War of 1971: ‘मरकर’ जिंदा हुए थे लांस नायक श्रीपति सिंह, जानें ‘वीर चक्र’ से सम्मानित होने वाले इस जवान की कहानी

अस्पताल तक पहुंचने के से पहले उन्होंने बहादुरी की मिसाल पेश कर दी थी। उन्होंने 9 दिसंबर के दिन वीरता दिखाते हुए पाकिस्तान के सेवर जेट विमान को रोके रखा था।

War of 1971

फाइल फोटो।

War of 1971: अस्पताल तक पहुंचने के से पहले उन्होंने बहादुरी की मिसाल पेश कर दी थी। उन्होंने 9 दिसंबर के दिन वीरता दिखाते हुए पाकिस्तान के सेवर जेट विमान को रोके रखा था।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में भयंकर युद्ध (War of 1971) लड़ा गया था। जंग के मैदान में भारतीय सेना (Indian Army) ने ऐसा पराक्रम दिखाया था जिसे यादकर दुश्मन देश आज भी थर-थर कांप उठता होगा। यूं तो युद्ध में हर एक जवान की अहम भूमिका होती है लेकिन कुछ जवान बहादुरी की ऐसी मिसाल पेश करते हैं जिन्हें सालों साल याद रखा जाता है।

युद्ध में एक मौका ऐसा भी आया था जब हमारा एक जवाब ‘मरकर’ जिंदा हो गया था और पाकिस्तान के दो विमानों को धवस्त कर दिया था। इस बहादुर का नाम लांस नायक श्रीपति सिंह है। ‘वीर चक्र’ विजेता सिंह 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान लायंस नायक श्रीपति सिंह पंजाब के बरनाला चौकी पर तैनात थे।

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दुश्मनों के हमले में श्रीपति घायल हो गए थे। उनके पीठ में दो गोली लगी थी। जोधपुर के अस्पताल में उन्हें भेजा गया था, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

लेकिन भगवान ने तो इस वीर के लिए कुछ और ही सोच रखा था। सुबह होते-होते जब डॉक्टरों ने दोबारा जांच कि तो पाया कि उनकी नब्ज चल रही है। इसके बाद उनका इलाज किया गया और उन्होंने बेरतरीन रिकवरी हासिल की। अस्पताल तक पहुंचने के से पहले उन्होंने बहादुरी की मिसाल पेश कर दी थी। उन्होंने 9 दिसंबर के दिन वीरता दिखाते हुए पाकिस्तान के सेवर जेट विमान को रोके रखा था।

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उन्होंने ऐसा फायर गन से फायरिंग करते हुए किया। बताया जाता है कि एक से एक मिनट में 240 राउंड गोलियां चलती थी। इससे उन्होंने दुश्मनों के विमानों को रेंज में आने से दो घंटे तक रोके रखा। इस दौरान उन्होंने दो विमानों को मार गिराया। हालांकि, इस दौरान वे दुश्मनों के हमले में घायल हो गए थे और फिर उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां वह ‘मरकर’ भी जिंदा हो गए थे।

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