1965 की जंग: क्या था ऑपरेशन जिब्राल्टर? पाकिस्तान ने ऐसे बिछाई थी युद्ध की बिसात

दुश्मनों ने 8 सितंबर 1965 को खेमकरण सेक्‍टर के उसल उताड़ गांव पर धावा बोल दिया। ये हमला पैदल सैन्य टुकड़ी के साथ पैटन टैंक के साथ किया गया था।

Indian Army

भारतीय सेना (Indian Army)

दुश्मनों ने 8 सितंबर 1965 को खेमकरण सेक्‍टर के उसल उताड़ गांव पर धावा बोल दिया। ये हमला पैदल सैन्य टुकड़ी के साथ पैटन टैंक के साथ किया गया था।

पाकिस्तान (Pakistan) आजादी के बाद लगातार भारत के खिलाफ धोखेबाजी करता आया है। कश्मीर (Kashmir) को हड़पने के लिए पाकिस्तानी सेना अब तक सारी हदें पार कर चुकी है। भारतीय सेना के आगे दुश्मन देश को हमेशा हार का मुंह देखना पड़ा है। ऐसा ही 1965 के युद्ध में भी हुआ था। पाकिस्तानी सेना के ‘ऑपरेशन जिब्राल्टर’ को हमारी सेना ने बुरी तरह से धवस्त कर दिया था।

दरसअसल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कश्मीर हड़पने के लिए ऑपरेशन जिब्राल्टर की साजिश रची थी। दुश्मनों ने 8 सितंबर 1965 को खेमकरण सेक्‍टर के उसल उताड़ गांव पर धावा बोल दिया। ये हमला पैदल सैन्य टुकड़ी के साथ पैटन टैंक के साथ किया गया था। कश्मीर हड़पने का पाक सेना का यह एक बड़ा ही दुस्साहसी प्लान था।

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से मांगी मदद

इस ऑपरेशन के प्लान के तहत पाक सेना के जवान अलग-अलग वेश में कश्मीर में दाखिल होते और दंगे करवाते। प्लान के मुताबिक करीब 3 हजार सैनिक 8 अगस्त को कश्मीर में दाखिल हो गए और पुंछ में तैनात ब्रिगेड पर हमला बोल दिया। इस दौरान करारा जवाब दिया गया और ऑपरेशन जिब्राल्टर को नाकामयाब कर दिया गया। कश्मीरी मुसलमानों के बीच हिंसा उकसाने के मकसद से कश्मीर में प्रवेश किया गया।

सब कुछ प्लान के मुताबिक न होने के अभाव की में शुरूआत से ही रणनीति बहुत ही खराब हो गई। फिर क्या था भारतीय सेना ने घुसपैठियों को जल्द ही ढूंढ निकाला। इसी ऑपरेशन ने 1965 में भारत-पाक युद्ध की शुरुआत की थी।

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