चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ सैम मानेकशॉ के नेतृत्व में लड़ा गया था 1971 का युद्ध, जानें कौन थे ये

1971 के भारत-पाकिस्तान जंग में सैम मानेकशॉ की मुख्य भूमिका रही और पाक के खिलाफ जीत हासिल की गई थी। वह युद्ध में पूरी तैयारी के साथ उतरे थे।

भारत के 8वें चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ रहे सैम मानेकशॉ।

भारत के 8वें चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ रहे सैम मानेकशॉ के नेतृत्व में 1971 का भारत-पाक युद्ध (India-Pakistan War) लड़ा गया था। इनका पूरा नाम सैम होरमूज़जी फ़्रामजी जमशेदजी मानेकशॉ था। मानेकशॉ के नेतृत्व में लड़े गए इस युद्ध में भारत पाकिस्तान  के बाद एक तीसरे देश का गठन हुआ जिसका नाम बांग्लादेश रखा गया। मानेकशॉ को हिन्दुस्तान के सबसे ताकतवर, सबसे मजबूत आर्मी चीफ में से एक माना जाता है।

1971 के भारत-पाकिस्तान (Pakistan) जंग में सैम मानेकशॉ की मुख्य भूमिका रही और पाक के खिलाफ जीत हासिल की गई थी। वह युद्ध में पूरी तैयारी के साथ उतरे थे और दुश्मन देश को हर मोर्चे पर फेल कर दिया था। दरअसल 1971 में पूर्वी पाकिस्तान में आजादी का आंदोलन दिन ब दिन तेज होता जा रहा था। पूर्वी पाकिस्तान में रेप, लूट, हत्याएं होने लगी तो लोग भारत में शरणार्थी बनकर पश्चिम बंगाल असम में आकर बसने लगे।

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से मांगी मदद

एक करोड़ से ज्यादा पूर्वी पाकिस्तान के लोग भारत में घुस चुके थे। तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन लेने की ठान ली। पाक सेना के अत्याचारों से भारत को भी नुकसान हो रहा था। सैम को मार्च में युद्ध लड़ने के लिए कहा गया लेकिन उन्होंने अधूरी तैयारी के चलते युद्ध लड़ने से मना कर दिया। इसके बाद जब सेना पूरी तैयारी के साथ पाकिस्तान के खिलाफ उतरी तो दुश्मन देश को हरा कर ही दम लिया।

अंग्रेजों की सेना के लिए लड़ा करते थे मानेकशॉ

1942 के दौरान मानेकशॉ अंग्रेजों की सेना के लिए लड़ा करते थे। आजादी से पहले वे ब्रिटेन इंडिया आर्मी में कैप्टन थे। 1942 में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बर्मा में एक जापानी सैनिक ने उन्हें 7 गोलियां मारी थीं, जो उनके आंतों, जिगर और गुर्दों में लगीं थीं। बावजूद बिना किसी डर के वे जंग के मैदाम में डटे रहे थे।

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