कारगिल युद्ध की कहानी पदम देव ठाकुर की जुबानी, इनकी बटाल‍ियन ने फतह किया था टाइगर हिल

युद्ध में सूबेदार मेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए पदम देव ठाकुर ने भी हिस्सा लिया था। युद्ध के दिनों को याद करते हुए उन्होंने अपने अनुभव को साझा किया है।

Indian Army

फाइल फोटो।

Kargil War 1999: युद्ध में सूबेदार मेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए पदम देव ठाकुर (Padam Dev Thakur) ने भी हिस्सा लिया था। युद्ध के दिनों को याद करते हुए उन्होंने अपने अनुभव को साझा किया है। वे बताते हैं कि हमारे जवान सीने पर गोली खाकर भारत मां की रक्षा कर रहे थे।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में कारगिल युद्ध (Kargil War) लड़ा गया था। इस युद्ध में भारतीय सेना (Indian Army) ने जीत हासिल की थी। युद्ध में 527 जवान शहीद हुए थे, तब जाकर हमें यह जीत हासिल हुई थी। इसके साथ ही 1,300 से ज्यादा जवान घायल हुए थे। पाकिस्तान (Pakistan) को इससे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा था।

इस युद्ध में सूबेदार मेजर के पद से सेवानिवृत्त हुए पदम देव ठाकुर (Padam Dev Thakur) ने भी हिस्सा लिया था। युद्ध के दिनों को याद करते हुए उन्होंने अपने अनुभव को साझा किया है। वे बताते हैं कि हमारे जवान सीने पर गोली खाकर भारत मां की रक्षा कर रहे थे। दुश्मनों की गोलियों के बीच सिर्फ हमारा एक ही लक्ष्य था और वह था हमारी जीत।

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18 ग्रेनेडियर बटालियन के साथ पदम देव ठाकुर ने इस युद्ध में हिस्सा लिया था। वे बताते हैं, “मैं युद्ध के दौरान नायब सूबेदार के पद पर था। 4 जुलाई के दिन टाइगर हिल फतह की थी। तोलोलिंग पर कब्जा करने के बाद टाइगर हिल फतह करना बड़ा टास्क था।”

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हिमाचल के सोलन जिले के अर्की उपमंडल के बपड़ोहन गांव के रहने वाले पदम देव (Padam Dev Thakur) आगे बताते हैं, “हम इस पहाड़ी को फतह करने के लिए निकले थे तो हमें दुश्मनों की लोकेशन का कोई अंदाजा नहीं था। यही वजह थी कि हमारे कई जवान शहीद हो गए क्योंकि दुश्मन ऊंचाई पर था और वह हमारी मूवमेंट को आसानी से देख सकता था।”

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