रॉ एजेंटों को दी जाती है कड़ी ट्रेनिंग, आसान नहीं है जासूस बनना

भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी रॉ एजेंट बनना बेहद मुश्किल माना जाता है। इस विभाग में ऐसे लोगों को शामिल किया जाता है जो बेहद चालाक और परिस्थिति को अपने अनुकूल ढालने में माहिर हों।

RAW Agent Training

ट्रेनिंग के दौरान युवा। (File Photo)

RAW Agent Training: रॉ में शामिल होने के लिए कोई डायरेक्ट भर्ती नहीं होती है। इसमें शामिल होने से पहले आपको डिफेंस सेक्टर या फिर इंडियन सिविल डिपार्टमेंट में शामिल होना होता है।

भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी रॉ एजेंट बनना बेहद मुश्किल माना जाता है। इस विभाग में ऐसे लोगों को शामिल किया जाता है जो बेहद चालाक और परिस्थिति को अपने अनुकूल ढालने में माहिर हों।

देश की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखने के लिए हर देश के पास खुफिया विभाग होता है। भारत भी ऐसे ही देशों में शामिल है जो कि खुफिया विभाग के जरिए कई बड़े खतरों को टाल चुका है।

रॉ एजेंट बनने के बाद ऐसी होती है जीवन शैली, जानें रोचक तथ्य

रॉ में शामिल होने के लिए कोई डायरेक्ट भर्ती नहीं होती है। इसमें शामिल होने से पहले आपको डिफेंस सेक्टर या फिर इंडियन सिविल डिपार्टमेंट में शामिल होना होता है। यहां लंबा अनुभव लेने के बाद आप रॉ में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, आपको इंटरव्यू क्लीयर करना होता है। इसके बाद ट्रेनिंग (Raw Agent Training) दी जाती है जो कि दो स्तर पर होती है।

एजेंट्स को बेसिक और बाद में उच्च स्तरीय ट्रेनिंग दी जाती है। बुनियादी परीक्षण में 10 दिनों की ट्रेनिंग (Raw Agent Training) होती है। इस दौरान एजेंट्स को जासूसी की कुछ बेसिक जानकारियां दी जाती हैं। इसके बाद उच्च स्तरीय ट्रेनिंग में उन्हें फील्ड इंटेलिजेंस ब्यूरो में भेजा जाता है।

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यहां करीब 2 साल तक कड़ी ट्रेनिंग होती है। एजेंट्स को इस दौरान ठंडे और घने जंगलों में सुरक्षित रहने के तरीकों के गुर सिखाए जाते हैं। इसके साथ ही गुप्त ऑपरेशनों को संचालित करने की भी ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद उन्हें फिर से बेसिक ट्रेनिंग कैम्प भेज दिया जाता है। जो एजेंट ट्रेनिंग (Raw Agent Training) में सफल होता है उसे जासूसी के लिए पात्र माना जाता है।

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