रॉ एजेंट बनने के बाद ऐसी होती है जीवन शैली, जानें रोचक तथ्य

भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (Research and Analysis Wing) यानी रॉ का पूरा दुनिया में बोलबाला है। यह एजेंसी इतना बेहतरीन काम करती है जिसकी मिसालें पेश की जाती हैं।

RAW Agent

प्रतीकात्मक तस्वीर।

RAW Agent: रॉ एजेंट बनने के बाद जीवन शैली में पूरी तरह से बदलाव हो जाता है। रॉ एजेंटों को काफी जांच-पड़ताल करनी पड़ती है एवं बैठकों में शामिल होना पड़ता है।

भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (Research and Analysis Wing) यानी रॉ (RAW) का पूरी दुनिया में बोलबाला है। यह एजेंसी इतना बेहतरीन काम करती है, जिसकी मिसालें पेश की जाती हैं।

देश की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखने के लिए हर देश के पास खुफिया विभाग होता है। भारत भी ऐसे ही देशों में शामिल है जो कि खुफिया विभाग के जरिए कई बड़े खतरों को टाल चुका है। यहां ऐसे लोगों की जरूरत होती है जो अपनी पहचान छिपाकर रखें। ऐसा इसलिए क्योंकि ये पूरी तरह से जासूसी का कार्य है।

जासूसों के पास होते हैं कई तरह के खुफिया गैजेट्स, दुश्मनों की हर चाल पर रखी जाती है नजर

रॉ एजेंट (RAW Agent) बनने के बाद जीवन शैली में पूरी तरह से बदलाव आ जाता है। रॉ एजेंटों को काफी जांच-पड़ताल करनी पड़ती है एवं बैठकों में शामिल होना पड़ता है।

रॉ एजेंटों को देश-विदेश की यात्राएं करने का अवसर मिलता है। कई एजेंट तो ऐसे हैं जो कि कई सालों से दूसरे देशों में रह रहे हैं और वहां की खुफिया जानकारियां भारत तक पहुंचा रहे हैं। जासूसी करना सबसे खतरनाक काम माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि थोड़ा सा भी शक और फिर जिंदगी भर जेल। ऐसे कई मामले सामने आते रहे हैं जब हमारे जासूसों को दुश्मन देश ने कैद कर लिया हो।

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इनके बारे में कभी भी कोई जानकारी लीक नहीं की जाती। सुरक्षा हेतु उनके नाम की जानकारी किसी को नहीं दी जाती है। रॉ एजेंट (RAW Agent) की एक से ज्यादा भाषाओं पर भी मजबूत पकड़ होती है। कुछ सीक्रेट ऑपरेशन काफी जोखिम भरे होते हैं। 

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