1965 की लड़ाई की जीत का झूठा जश्न मनाता है पाकिस्तान, युद्धविराम की घोषणा कर पीछे हट गई थीं सेनाएं

पाकिस्तान 1965 में लड़े गए युद्ध में खुद को जीता हुआ मानता है। वह इसका लगातार जश्न भी मानाता आ रहा है जो कि झूठ पर आधारित है।

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पाकिस्तान इस युद्ध में खुद की जीत मानता आया है वह इसका जश्न भी मानाता आ रहा है जो कि झूठ पर आधारित है।

पाकिस्तान और भारत के बीच 1965 में युद्ध हुआ था। युद्ध की नींव कच्छ के लगभग अनजान और बियाबान इलाके में हुई सीमित मुठभेड़ से रखी गई थी। पाक ने डींग और सुराई को जोड़ने के लिए 18 मील लंबी एक कच्ची सड़क बना ली थी जो कि भारतीय सीमा में दखल दे रही थी। पाक सैनिक स्थानीय लोगों की वेशभूषा में भारत घुसे थे। भारत को जैसे ही यह बात पता चली तो आपत्ति दर्ज कराई गई।

पीछे हटने के बावजूद पाक सेना ने इस इलाके में गश्त और ज्यादा बढ़ा दी। पाक सेना आक्रमक थी तो भारतीय सेना कैसे नरम रह सकती थी। भारत ने कंजरकोट के करीब आधा किलोमीटर दक्षिण में सरदार चौकी बना ली। ऐसे धीरे-धीरे विवाद गहराता गया और जिसने बाद में युद्ध का रूप धारण कर लिया।

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9 अप्रैल की सुबह दो बजे पाकिस्तानी हमला शुरू हुआ और भारतीय सेना अलर्ट हो गई। इसके बाद दोनों तरफ से गोलाबारी होने लगी और सैनिक आपस में लड़ने लगे। पाक सेना खेमकरण पर कब्जा कर अमृतसर का इलाका काटना चाहती थी लेकिन भारतीय सेना ने ऐसा होने नहीं दिया था।

इस युद्ध में यूं तो हमारे सभी जवानों का योगदान रहा लेकिन कुछ जवान ऐसे हैं जिनके शौर्य की गाथा आज भी सुनाई देती है। इस युद्ध में वीर अब्दुल हमीद ‘हीरो’ के तौर पर उभरे। हमीद ने शौर्य का परिचय देते हुए अपनी जीप से पाकिस्तान के आठ टैंक ध्वस्त कर दिए थे। ये वे टैंक थे जो उस समय ‘अपराजेय’ माने जाते थे।

जंग भले ही युद्धविराम पर खत्म हुई हो, लेकिन 1965 में जीत भारत की हुई थी। पाकिस्तान इस युद्ध में खुद की जीत मानता आया है वह इसका जश्न भी मनाता आ रहा है जो कि झूठ पर आधारित है। सच्चाई यह है कि इस युद्ध में भारत की ही जीत हुई थी।

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