‘हमने सोच रखा था कुछ भी हो जाए दुश्मन को नुकसान पहुंचाकर ही रहेंगे’, जानें कारगिल योद्धा का अनुभव

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में कारगिल युद्ध (Kargil War) लड़ा गया था। इस युद्ध में पाकिस्तान को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था।

Kargil War

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Kargil War: ‘हमने सोच रखा था कुछ भी हो जाए दुश्मन को नुकसान पहुंचाकर ही रहेंगे। मौत निश्चित तो थी ही। 5 जुलाई की सुबह हम उनके बंकर में घुस गए और इसके बाद फायरिंग शुरू हो गई।’

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में कारगिल युद्ध (Kargil War) लड़ा गया था। इस युद्ध में पाकिस्तान को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा था। पाकिस्तान को इस युद्ध में हार के साथ ही भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था। पाकिस्तान के खिलाफ जंग लड़ने वाले कई जवान इस युद्ध में शामिल हुए थे लेकिन एक जवान ऐसे थे जिन्होंने अपनी वीरता के दम पर सबकी नजर अपनी ओर खींची थी।

ये थे ‘परमवीर च्रक’ विजेता यादव। इस युद्ध में बहादुर दिखाने के लिए ही इन्हें सबसे बड़े सैन्य सम्मान ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित किया गया था। उन्होंने इस युद्ध से जुड़े किया है।

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वे बताते हैं कि आगे बताते हैं, “हमने सोच रखा था कुछ भी हो जाए दुश्मन को नुकसान पहुंचाकर ही रहेंगे। मौत निश्चित तो थी ही। 5 जुलाई की सुबह हम उनके बंकर में घुस गए और इसके बाद फायरिंग शुरू हो गई। हम छिपे रहे। जो जवान हमारे नीचे थे उनसे हमने एम्यूनेशन मांगे और उन्होंने फेंक दिए।”

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वे आगे बताते हैं, “हम इतने लाचार थे कि एक कदम दूर पड़े एम्युनिशन को उठा नहीं सकते थे, क्योंकि दुश्मन हमपर नजर बनाए हुए था। फायरिंग के बाद पाकिस्तान के 10 से 12 जवान यह जानने के लिए निकले की भारत के कितने जवान है और वह मरे या नहीं।”

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