Kargil War: युद्ध से वापस आकर बनाना चाहते थे, जानें इस जवान की शहादत की कहानी

Kargil War: 8 नवंबर, 1960 को एक किसान परिवार में जन्में लक्ष्मण सिंह अपने गांव में मकान बनवा रहे थे तभी पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध छिड़ गया था।

Kargil War

फाइल फोटो।

Kargil War: 8 नवंबर, 1960 को एक किसान परिवार में जन्में लक्ष्मण सिंह अपने गांव में मकान बनवा रहे थे तभी पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध छिड़ गया था।

भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1999 में लड़े गए कारगिल युद्ध (Kargil War) के दौरान भारतीय सेना (Indian Army) ने शानदार प्रदर्शन किया था। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर कब्जा करके बैठे पाकिस्तानी जवानों को हमारी सेना ने भगा-भगाकर मारा था। ऐसा सेना के जवानों के जज्बे और भारत मां की रक्षा के उनके संकल्प के चलते ही संभव हो सका था।

इस युद्ध में कई जवानों ने शहादत देकर भारतीय सरहद की रक्षा की। ऐसे ही एक जवान थे, हरियाणा के गांव महलाना के लक्ष्मण सिंह। उन्होंने युद्ध में शानदार प्रदर्शन कर दुश्मनों को धूल चटाई थी।

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बुलंद हौसलों के साथ जंग के मैदान में ही वह शहीद हो गए थे। 8 नवंबर, 1960 को एक किसान परिवार में जन्में लक्ष्मण सिंह अपने गांव में मकान बनवा रहे थे, तभी पाकिस्तान और भारत के बीच कारगिल युद्ध (Kargil War) छिड़ गया था।

मकान का काम चल ही रहा था और उनको हाई कमान का बुलावा आ चुका था। उन्होंने कहा था कि अभी देश सेवा का वक्त है और मकान वापस आने पर फिर से बनाया जाएगा। हालांकि, वह वापस नहीं लौट सके और युद्ध में दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए।

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शहीद लक्ष्मण सिंह 1 जून को कारगिल के लिए घर से निकले थे और 9 जून, 1999 को शहीद हो गए थे। आज उनका बेटा भारत मां की रक्षा में तैनात है और सेना में भर्ती हो चुका है। जिस तरह पिता ने देश के लिए जान की बाजी लगा दी, वह किसी भी बेटे के लिए प्रेरणा स्रोत है।

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