कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना का था बड़ा योगदान, हजारों फीट की ऊंचाई से पाक सैनिकों पर बरसाए थे बम

कारगिल युद्ध में सेना को लीड करने वाले कई अधिकारियों ने कई मौकों पर कहा है कि भारतीय वायुसेना के हवाई हमले से दुश्मन का मनोबल टूटा था। वायुसेना ने 32 हजार फीट की ऊंचाई से जम्मू कश्मीर के द्रास-कारगिल इलाके में टाइगर हिल पर एयर पावर का इस्तेमाल किया था।

Kargil war कारगिल

कारगिल: 26 जुलाई, 1999 के दिन भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध के दौरान चलाए गए 'ऑपरेशन विजय' को सफलतापूर्वक अंजाम देकर भारत भूमि को घुसपैठियों के चंगुल से मुक्त कराया था। इसी की याद में '26 जुलाई' हर वर्ष कारगिल दिवस के रूप में मनाया जाता है।

कारगिल युद्ध में थल सेना और वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ ऐसी आक्रमकता दिखाई थी जिसे याद कर आज भी दुश्मन देश कांप उठता है। 1999 में जितना अहम रोल आर्मी का था उतना ही वायुसेना का भी था। ऊंची पहाड़ियों पर दुश्मन को हराने के लिए वायुसेना का बखूबी इस्तेमाल किया जाता है। अक्सर युद्ध की स्थिति में वायुसेना की भूमिका अहम हो जाती है।

कारगिल युद्ध में सेना को लीड करने वाले कई अधिकारियों ने कई मौकों पर कहा है कि भारतीय वायुसेना के हवाई हमले से दुश्मन का मनोबल टूटा था। वायुसेना ने 32 हजार फीट की ऊंचाई से जम्मू कश्मीर के द्रास-कारगिल इलाके में टाइगर हिल पर एयर पावर का इस्तेमाल किया था। इस दौरान अलग-अलग ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए मिग-27 और मिग-29, चीता हेलिकॉप्टर का भी इस्तेमाल किया गया। मिग-27 और मिग-29 के जरिए पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों पर बम गिराए गए थे। इस दौरान कई ठिकानों पर आर-77 मिसाइलों से हमला किया गया था।

वायुसेना के चीता हेलिकॉप्टर के जरिए हमारे घायल जवानों को एयरलिफ्ट किया गया था। इसके साथ ही सैनिकों तक हथियार पहुंचाने और अन्य जरूरी सामान भी इसी के जरिए पहुंचाए गए थे। वायु सेना ने इस दौरान 15000 फीट और उससे अधिक ऊंचाई पर स्थित पोस्ट पर हथियार पहुंचाए।  इस दौरान वायुसेना पर पाकिस्तान सेना की तरप से स्ट्रिंगर मिसाइलों के जरिए हमले किए जाते थे लेकिन सेना इसका मुंह तोड़ जवाब देती थी। सेना ने लेजर गाइडेड बम (एलजीबी) के हमले किए जिससे पाक सेना के नापाक मंसूबों पर पानी फिरता चला गया।

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बता दें कि कारगिल युद्ध से भारत और पाकिस्तान के संबंधों में सुधार हो रहा था। तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी अपने मंत्रियों के सात लाहौर गए थे। एक तरफ भारत के दिग्गज नेताओं का लाहौर में स्वागत किया जा रहा था तो दूसरी तरफ षड्यंत्र रचा गया। पूर्व पीएम वाजपेयी ने इस पूरे घटनाक्रम के सामने आते ही नवाज शरीफ से कहा था कि मेरा लाहौर बुलाकर स्वागत करते हैं और उसके बाद कारगिल का युद्ध छेड़ देते हैं यह बहुत बुरा व्यवहार है।

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