कारगिल युद्ध का ‘हीरो’ था मिग-27 विमान, पायलटों की पत्नियों ने दिया था ये खास नाम

युद्ध के दौरान इंडियन एयर फोर्स ने दुश्मनों का सफाया करने के लिए ऑपरेशन ‘सफेद सागर’ चलाया था। उस दौरान मिग-27 के अलावा मिग 21 का भी इस्तेमाल किया गया था।

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मिग-27 एयरक्राफ्ट। (फाइल फोटो)

इन विमानों को उड़ाने वाले पायलटों ने कई मौकों पर इसकी जानकारी साझा की है। पायलटों के मुताबिक एक जमाना ऐसा भी था जब यही मिग 27 दूसरी नहीं बल्कि पहली पत्नी के रूप में हमारे साथ था।

कारगिल युद्ध (Kargil War) में पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय वायुसेना ने मिग-27 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया था। पाकिस्तान (Pakistan), कश्मीर हड़पने की सोचकर कब्जा करने आया था लेकिन सेना ने उन्हें भगा-भगाकर मारा। सेना के सामने इस युद्ध में एक से बढ़कर एक कई चुनौतियां थीं।

इस विमान का इस्तेमाल कर वायुसेना ने दुश्मनों को चारों खाने चित कर दिया था। भारतीय सेना को 1999 में जैसे ही इस घुसपैठ की जानकारी मिली तो सेना ने मिग-27 के जरिए युद्ध का आगाज कर दिया था। इस विमान को चलाने वाले पायलटों की पत्नियां इस विमान को ‘सौतन’ कहकर पुकारती थीं।

खुद इन विमानों को उड़ाने वाले पायलटों ने कई मौकों पर इसकी जानकारी साझा की है। पायलटों के मुताबिक एक जमाना ऐसा भी था जब यही मिग 27 दूसरी नहीं बल्कि पहली पत्नी के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा था।

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ये विमान पिछले साल ही सेना से रिटायर किया गया है। इसे वायु सेना के बेड़े में 1985 में शामिल किया गया था। मिग-27 ने 34 साल तक भारत वायुसेना की सेवा की। पिछले 4 दशक से ये भारतीय वायुसेना की असली ताकत थी।

बता दें कि युद्ध के दौरान इंडियन एयर फोर्स ने दुश्मनों का सफाया करने के लिए ऑपरेशन ‘सफेद सागर’ चलाया था। उस दौरान मिग-27 के अलावा मिग 21, मिग 23 और मिरजा 2000 जैसे लड़ाकू विमानों का भी इस्तेमाल किया गया था।

इन विमानों के जरिए दुश्मन को कमरतोड़ जवाब देते हुए जमकर बमबारी की गई थी। मिराज 2000 की खासियत है कि इनमें लेजर गाइडेड बमों से हमला करने की क्षमता है। कारगिल युद्ध में भारतीय सेना की जीत की 21वीं वर्षगांठ 26 जुलाई को मनाई जाएगी। 

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