Kargil War 1999: दुश्मन टाइगर हिल पर कब्जा जमाए बैठे थे, लगातार हो रही थी बमबारी

यह पोस्ट सामरिक रूप से हमारे लिए बेहद महत्व रखती है। इसपर दुश्मन का कब्जा लगातार बने रहने का मतलब था भारतीय सरजमीं पर पाक सेना की आसानी से पहुंच हो जाना।

Kargil War 1999

भारत-पाक सीमा से सटे कारगिल क्षेत्रों में सर्दियों कड़ाके की ठंड पड़ती है।

Kargil War 1999: दुश्मन का कब्जा लगातार बने रहने का मतलब था भारतीय सरजमीं पर पाकिस्तानी सेना और आतंकवादियों की आसानी से पहुंच हो जाना।

भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में कारगिल युद्ध (Kargil War 1999) लड़ा गया था। इस युद्ध में हमारे वीर सपूतों ने पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) को धूल चटा दी थी। दरअसल, दोनों देशों के बीच 1972 में हुए शिमला समझौते के तहत तय हुआ था कि ठंड के मौसम में दोनों देशों की सेनाएं जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) में बेहद बर्फीले स्थानों पर मौजूद लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) को छोड़कर कम बर्फीले वाले स्थान पर चली जाएंगी।

ऐसा इसलिए क्योंकि सर्दियों में ऐसी जगहों का तापमान माइनस डिग्री में चले जाने की वजह से दोनों देशों की सेनाओं को काफी मुश्किलें होती थीं। पर 1999 में पाकिस्तान (Pakistan) ने ऐसा नहीं किया और भारतीय सरजमीं में घुसपैठ कर दिया। इसके बाद, अलग-अलग ऑपरेशन कर पाकिस्तानी सेना को हराया गया था। इनमें सबसे खास था टाइगर हिल (Tiger Hill) फतह करना।

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दरअसल, युद्ध (Kargil War 1999) के दौरान दुश्मन टाइगर हिल पर कब्जा जमाए बैठे थे। इस दौरान वे लगातार बमबारी और गोलियां चला रहे थे। यह पोस्ट सामरिक रूप से हमारे लिए बेहद महत्व रखती है। इसपर दुश्मन का कब्जा लगातार बने रहने का मतलब था भारतीय सरजमीं पर पाकिस्तानी सेना और आतंकवादियों (Terrorists) की आसानी से पहुंच हो जाना।

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टाइगर हिल फतह करने के लिए चलाए गए ऑपरेशन के दौरान चोटी पर चढ़कर दुश्मन के ठिकानों को बरबाद करना ही सेना का पहला लक्ष्य था। इससे लिए सबसे पहले तोलोलिंग से घुसपैठियों का कब्जा हटाने की योजना बनाई गई। दुश्मनों पर काबू पाने के लिए मेजर राजेश सिंह अधिकारी को बड़ी जिम्मेदारी दी गई।

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