Kargil Vijay Diwas 2019: पाकिस्तानी घुसपैठियों की बर्बरता के आगे भी नहीं झुका यह जांबाज

सौरभ कालिया की उम्र उस वक्त 23 साल थी और अर्जुन राम की महज 18 साल। कैप्टन सौरभ कालिया सेना में नियुक्ति के बाद अपनी पहले महीने की सैलरी भी नहीं उठा पाए थे।

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कई जवान ऐसे भी हैं, जिन्होंने जंग शुरू होने से पहले ही शहादत दे दी थी। ऐसे ही एक बहादुर जांबाज हैं कैप्टन सौरभ कालिया।

कैप्टन सौरभ कालिया यह नाम उस सैनिक का है, जिसे कारगिल युद्ध का पहला शहीद माना जाता है. कैप्टन सौरभ कालिया मात्र 23 वर्ष की उम्र में देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए थे.

Kargil Vijay Diwas 2019: आज भारत कारगिल युद्ध की 20वीं वर्षगांठ पर जश्न मना रहा है, लेकिन इस जश्न के पीछे हैं 527 ऐसे जवान, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान गवां दी। इन जवानों में कई जवान ऐसे भी हैं, जिन्होंने जंग शुरू होने से पहले ही शहादत दे दी थी। ऐसे ही एक बहादुर जांबाज हैं कैप्टन सौरभ कालिया। मई के पहले दो सप्ताह बीत चुके थे। अभी तक हमारी सेना घुसपैठियों को लेकर सिर्फ आंकलन कर रही थी। इस बीच कारगिल के समीप काकसर की बजरंग पोस्ट पर तैनात 4 जाट रेजिमेंट के कैप्टन सौरभ कालिया और उनके पांच साथियों सिपाही अर्जुन राम, भंवर लाल, भीखा राम, मूला राम व नरेश सिंह को क्षेत्र का मुआयना करने के लिए भेजा गया, ताकि स्थिति का सही-सही पता लग सके।

कैप्टन सौरभ कालिया अपने साथियों के साथ सीमा के पास घुसपैठियों के लोकेशन की जानकारी लेने निकल पड़े। गश्ती के दौरान भारतीय सीमा के अंदर पाकिस्तानी वर्दी में कुछ लोग नजर आए। कैप्टन सौरभ ने बिना देर किए इसकी खबर अपने अधिकारियों तक पहुंचाई और खुद अपने साथियों के साथ दुश्मनों को खदेड़ने के लिए उनपे हमला कर दिया। पाकिस्तानी घुसपैठी पहले से तैयार बैठे थे और बड़ी संख्या में थे। एक घंटे से ज्यादा देर तक दोनों तरफ से फायरिंग और गोलाबारी हुई। कैप्टन सौरभ और उनके साथियों के पास गोला बारूद खत्म हो गए। जिसके बाद घुसपैठियों ने कैप्टन सौरभ और इनके पांच साथियों को पकड़ लिया।

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20 दिन बाद वहां से भारतीय जवानों के शव वापस आए तो पता चला कि भारतीय जवानों के साथ पाकिस्तानियों ने बेरहमी की सारी हदें पार कर दी थी। उन्हें सिगरेट से जलाया गया था और उनके कानों में लोहे की सुलगती छड़ें घुसेड़ी गई थीं। 20 दिनों तक इन्हें जबरदस्त यातना दी गई। घुसपैठियों ने उनकी डेड बॉडी को बुरी तरह से क्षत-विक्षत कर दिया था। उनकी पहचान मिटाने के लिए चेहरे और बॉडी पर धारदार हथियार से कई बार प्रहार किया गया था। उसके बाद घुसपैठिए शहीदों की डेड बॉडी को छोड़कर भाग गए थे।

सौरभ कालिया की उम्र उस वक्त 23 साल थी और अर्जुन राम की महज 18 साल। कैप्टन सौरभ कालिया सेना में नियुक्ति के बाद अपनी पहले महीने की सैलरी भी नहीं उठा पाए थे। उन्हें सेना ज्वाइन किए हुए मात्र एक महीने ही हुए थे। उन्हें पहली पोस्टिंग कारगिल में मिली थी। हिमाचल प्रदेश के पालमपुर के रहने वाले कैप्टन सौरभ कालिया 12 दिसंबर, 1998 को भारतीय थलसेना में कमीशन अधिकारी के रूप में नियुक्त हुए। कैप्टन सौरभ कालिया जैसे नायक सदियों में एक बार जन्म लेते हैं, उनको अदम्य साहस और वीरता को देश आज भी नमन करता है।

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