कारगिल के इस योद्धा ने 19 साल तक लड़ी पेंशन की लड़ाई लेकिन नहीं मानी हार

उन्होंने कारगिल युद्ध की सबसे दुर्गम चोटी टोलोलिंग पर दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देकर जीत हासिल की थी। इस दौरान उन्हें गोली लगी और वह घायल हो गए थे।

फाइल फोटो

बाउजी ने 1999 की कारगिल जंग तो जीत ली पर अभी एक और जंग जीतना बाकी थी। घायल होने के बाद उन्हें सेना से रिटायर होना पड़ा। अब उनके कंधों पर बच्चों को पढ़ाने लिखाने और घर चलाने की जिम्मेदारी थी।

लांस नायक सतवीर बाउजी के साथ आज पूरा देश कारगिल युद्ध का 21वां विजय दिवस मना रहा है। सतवीर बाउजी 2 राष्ट्रीय राजपूताना रायफल्स में लांस नायक पद पर तैनात थे। उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मनों को औंधे मुंह गिरा दिया था।

उन्होंने कारगिल युद्ध की सबसे दुर्गम चोटी टोलोलिंग पर दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देकर जीत हासिल की थी। इस दौरान उन्हें गोली लगी और वह घायल हो गए थे।

बाउजी ने 1999 की कारगिल जंग तो जीत ली पर अभी एक और जंग जीतना बाकी थी। घायल होने के बाद उन्हें सेना से रिटायर होना पड़ा। अब उनके कंधों पर बच्चों को पढ़ाने लिखाने और घर चलाने की जिम्मेदारी थी। रिटायर होने के बाद बाउजी को पेंशन नहीं मिल रही थी, और ना ही उनके किसी बच्चे को सेना में नौकरी दी गई थी।

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अब सवाल यह था कि बच्चों की स्कूल की फीस और घर का खर्च कैसे चलाया जाए। बाउ जी सैनिक थे, वह हार कहां मानते। पेंशन के लिए हर संभव कोशिश करते रहे। इस दौरान उन्होंने कई बार धरना दिया, प्रदर्शन किया, रक्षा मंत्री को पत्र लिखा, उनके सवालों को संसद में भी उठाया गया।

बाउजी की तमाम कोशिशें रंग लाईं और 19 साल बाद 2019 में उन्हे पेंशन मिलन शुरू हुआ।

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