कारगिल विजय: मेरठ से भेजी गई थी सेना की ये खास रेजीमेंट, शौर्य की गाथा सुन सीना हो जाएगा गर्व से चौड़ा

जंग में मेरठ के रणबांकुरों ने भी अद्भुत पराक्रम का परिचय दिया था। मेरठ से सेना की दो रेजीमेंट खास तौर पर कारगिल हिल पर कब्जा करने के लिए रवाना की गईं।

Kargil war कारगिल

जंग में मेरठ के रणबांकुरों ने भी अद्भुत पराक्रम का परिचय दिया था। मेरठ से सेना की दो रेजीमेंट खास तौर पर कारगिल हिल पर कब्जा करने के लिए रवाना की गईं।

पाकिस्तान के खिलाफ 1999 में लड़े गए कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने दुश्मनों को बुरी तरह से खदेड़ा था। भारतीय सेना के जवानों ने ऐसा पराक्रम दिखाया था जिसे यादकर दुश्मन आज भी डरता है। इस युद्ध में सेना के अंदर मौजूद अलग-अलग रेजीमेंट को दुश्मनों से लोहा लेने के लिए जंग के मैदान में भेजा गया था। युद्ध करीब 40 दिन चला था।

इस जंग में मेरठ के रणबांकुरों ने भी अद्भुत पराक्रम का परिचय दिया था। मेरठ से सेना की दो रेजीमेंट खास तौर पर कारगिल हिल पर कब्जा करने के लिए रवाना की गईं। मेरठ में तैनात 18 गढ़वाल राइफल्स को कारगिल के द्रास सेक्टर में दुश्मन का खात्मा करने के लिए भेजा गया था।

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हाई कमान ने जंग के बीच फैसला लेते हुए बटालियन को 19 जून की रात को प्वाइंट 5140 पर कब्जा करने की जिम्मेदारी दी थी। ये प्वाइंट सामरिक रूप से बेहद ही महत्वपूर्ण था। जिम्मेदारी निभाते हुए बटालियन ने भी मोर्चा संभाल लिया। दुर्गम पहाड़ियों की चोटियों पर यह कठिन कार्य था।

दुर्गम इलाके और कड़ाके की ठंड के बावजूद जान की परवाह न करते हुऐ 18 गढ़वाल राइफल्स के सपूतों ने बहादुरी का परिचय देते हुए द्रास सेक्टर की दुर्गम चोटियों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 22 जून 1999 को बटालियन को प्वाइंट 4700 से जक्षन प्वाइंट तक की चौकियों पर भी कब्जा कर लिया गया। बटालियन के इस प्रदर्शन को आज भी सराहा जाता है।

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