ऐसे हुआ था 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का अंत, जानें पूरी कहानी…

भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 में भीषण युद्ध (Indo-Pak War) लड़ा गया था। युद्ध में पाकिस्तान को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कश्मीर को हड़पने की बहुत बड़ी साजिश रची थी।

Indo-Pak War

फाइल फोटो।

Indo-Pak War of 1965: पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़कर बड़ी गलती कर दी थी। पाकिस्तान पर भारत की वायुसेना और थल सेना कहर बनकर टूट पड़ी थी।

भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1965 में भीषण युद्ध (Indo-Pak War) लड़ा गया था। इस युद्ध में पाकिस्तान को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने कश्मीर को हड़पने की बहुत बड़ी साजिश रची थी, हमारे जिसे जवानों ने हर मोर्चे पर फेल कर दिया था। 

पाकिस्तान को भारतीय सैनिकों ने हर मोर्चे पर विफल किया था। भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 के युद्ध (Indo-Pak War) की नींव कच्छ के लगभग अनजान और बियाबान इलाके में हुई एक मुठभेड़ से रखी गई थी।

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दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर तनातनी चल रही थी, जिनमें जम्मू और कश्मीर का मुद्दा भी सबसे बड़ा था। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ युद्ध (Indo-Pak War) छेड़कर बड़ी गलती कर दी थी। पाकिस्तान पर भारत की वायुसेना और थल सेना कहर बनकर टूट पड़ी थी।

युद्ध का अंत तब हुआ जब पंजाब के तरनतारन जिले के खेमकरण में भारत से कमजोर साबित होने के बाद पाकिस्तान थम गया। हालांकि, युद्ध का पूरी तरह से अंत यूनाइटेड नेशन्स द्वारा सीजफायर की घोषणा के साथ हुआ। सीजफायर की घोषणा से पहले ही भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ बहुत कुछ हासिल कर लिया था।

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भारत ने पाकिस्तान के सियालकोट, लाहौर और कश्मीर के कुछ उपजाऊ इलाके जीत लिए थे। हालांकि, पाकिस्तान के पास भी भारत के कुछ इलाके थे, जिनमें छंब और सिंध जैसे इलाके शामिल थे। युद्ध में पूरी तरह से विराम लगाने के लिए जनवरी, 1966 में ताशकंद समझौता हुआ था।

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इस समझौते के तहत दोनों देशों ने एक-दूसरे के कब्जे वाले इलाकों को वापस कर दिया था। युद्ध  में कच्छ से ताशकंद तक सेना हावी रही थी। भारत चाहता तो इस पूरे युद्ध के जरिए पाकिस्तान का  नामो-निशान मिटा सकता था, लेकिन हमने संघर्ष विराम का प्रस्ताव मंजूर किया।

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