INS ‘Karanj’: समुद्र में दुश्मनों को चकमा देने में माहिर, जानिए Indian Navy की इस पनडुब्बी की खासियत

समुद्र के भीतर दुश्मनों के नापाक इरादे को नाकाम करने के लिए भी जल सेना पूरी तरह सक्षम है। इसके लिए नेवी के पास एक से बढ़ कर एक ताकतवर पनडुब्बी हैं। इन्हीं में से एक है समुद्र में दुश्मनों के होश ठिकाने लगाने वाली स्कॉर्पीन श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी आईएनएस ‘करंज’ (INS ‘Karanj’)।

INS 'Karanj'

मुद्र में दुश्मनों के होश ठिकाने लगाने वाली स्कॉर्पीन श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी आईएनएस 'करंज' (INS 'Karanj')

जल क्षेत्र में भारत को दुश्मनों से बचाने के लिए इंडियन नेवी (Indian Navy) हर वक्त तैनात है। पानी के सतह से तो भारतीय नेवी दुश्मन पर पैनी नजर रखती ही है, समुद्र के भीतर दुश्मनों के नापाक इरादे को नाकाम करने के लिए भी जल सेना पूरी तरह सक्षम है। इसके लिए नेवी के पास एक से बढ़ कर एक ताकतवर पनडुब्बी हैं। इन्हीं में से एक है समुद्र में दुश्मनों के होश ठिकाने लगाने वाली स्कॉर्पीन श्रेणी की तीसरी पनडुब्बी आईएनएस ‘करंज’ (INS ‘Karanj’)।

INS 'Karanj'
आईएनएस ‘करंज’ (फाइल फोटो)।

जनवरी, 2018 में हुआ था लॉन्च: आईएनएस ‘करंज’ (INS ‘Karanj’) को 31 जनवरी, 2018 को नेवी वाईव्ज वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष रीना लांब ने लांच किया। रीना लांब तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा की पत्नी हैं। मुंबई के मझगांव डॉक पर आईएनएस ‘करंज’ को लॉन्‍च किया गया था। इस दौरान तत्कालीन नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा भी मौजूद थे।

दो पनडुब्बियां पहले ही हो चुकी हैं नेवी में शामिल: P-75 प्रोजेक्ट के तहत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा बनाए जाने वाली 6 पनडुब्बियों में से यह तीसरी है। 14 दिसंबर, 2017 को पहली स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस ‘कलवारी’ को भारतीय नौसेना में शमिल किया गया था। दूसरी स्कॉर्पीन पनडुब्बी जनवरी, 2017 में लांच की गई थी।

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यह है खासियत: आईएनएस ‘करंज’ (INS ‘Karanj’) एक स्वदेशी पनडुब्बी है, इसे पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ के तहत तैयार किया गया है। यह 67.5 मीटर लंबी, 12.3 मीटर ऊंची, 1565 टन वजनी है। यह पनडुब्बी टॉरपीडो और एंटी शिप मिसाइलों से हमले कर सकती है। यह पनडुब्बी किसी भी रडार की पकड़ में नहीं आ सकती। ये जमीन पर हमला करने में भी सक्षम है। साथ ही ये लंबे समय तक पानी में रुक सकती है।

दुश्मन के जहाज को चकमा देने में माहिर: आधुनिक तकनीक से बनी यह पनडुब्बी कम आवाज से दुश्मन के जहाज को चकमा देने में माहिर है। इसका इस्तेमाल ऐंटी-सबमरीन वॉरफेयर और इंटेलिजेंस के काम में भी किया जा सकता है। युद्ध की स्थिति में करंज पनडुब्बी हर तरह की अड़चनों से सुरक्षित और बड़ी आसानी से दुश्मनों की आंखों में धूल झोंक कर बाहर निकल सकती है।

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पानी के अंदर से दुश्‍मन पर हमला करने में सक्षम: इसमें सतह पर पानी के अंदर से दुश्‍मन पर हमला करने की खासियत भी है। पनडुब्बी में ऑक्सीजन खत्म होने की स्थिति में इसमें ऑक्सीजन बनाने की भी क्षमता है। इस परियोजना को फ्रांस के सहयोग से चलाया जा रहा है। इसे फ्रांस की रक्षा एवं ऊर्जा कंपनी DCNS ने डिजाइन किया है।

2029 तक 24 पनडुब्बियां बनाने की है योजना: आईएनएस ‘करंज’ (INS ‘Karanj’) ने भारत की ताकत और भी बढ़ा दी है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती मौजूदगी और अरब सागर के पास पाकिस्तान को कड़ा जवाब देने के लिए इस सबमरीन की भूमिका काफी अहम है। बता दें कि भारत की 2029 तक 24 पनडुब्बियां बनाने की योजना है। इसके पहले P-75 प्रोजेक्ट के तहत स्कॉर्पीन सीरीज की छह पनडुब्बियां बनाई जा रही हैं।

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