पहाड़ी युद्ध के लिए Indian Army सबसे अनुभवी, कारगिल वॉर में हो चुका है साबित

पर्वतीय क्षेत्र लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच भी कई बार भिड़ंत हो चुकी है। इस दौरान भी भारतीय सेना ने अपना लोहा मनाया है।

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Indian Army: पर्वतीय क्षेत्र लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच भी कई बार भिड़ंत हो चुकी है। इस दौरान भी भारतीय सेना ने अपना लोहा मनाया है।

भारतीय सेना दुश्मनों को हराने के लिए किसी भी हद तक गुजर सकती है। सेना के पास इसका अच्छा अनुभव भी है। माना जाता है कि पहाड़ों पर युद्ध के लिए भारतीय सेना सबसे अनुभवी है। कई मिलिट्री विशेषज्ञों का यही मानना है।

इतिहास भी इस बात को कई हद तक पुख्ता करता है। सेना ने 1999 में कारगिल युद्ध (Kargil War) के दौरान पहाड़ियों पर बेहतरीन तरीके से लड़ाई की थी। पाकिस्तानी सेना ऊंचाई पर बैठी थी जबकि भारतीय सेना नीचे थी।

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सेना ने इस दौरान अपना हौसला नहीं खोया और अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए दुश्मनों द्वारा कब्जाई गई हर पोस्ट पर वापस कब्जा कर लिया था।

पर्वतीय क्षेत्र लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच भी कई बार भिड़ंत हो चुकी है। इस दौरान भी भारतीय सेना (Indian Army) ने अपना लोहा मनवाया है।

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इंडियन आर्मी की पर्वतीय टुकड़ियों में लगभग सभी सदस्यों के लिए पर्वतारोहण अनिवार्य है। इसके लिए भारत ने बड़ी संख्या में निजी क्षेत्र से पेशेवर और शौकिया पर्वतारोहियों की भी भर्ती की है। पहाड़ पर युद्धाभ्यास किए जाते रहे हैं।

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सियाचिन जैसे पहाड़ी इलाकों में भी सेना के जवान हमेशा डटे रहते हैं। भारतीय सेना यहां की कड़ाके की ठंड में भी करीब 20 हजार फीट की ऊंचाई पर तैनात रहती है। अगर युद्ध के हालात बनते हैं तो जवान युद्ध में भी खुद को झोंकने से पीछे नहीं हटते हैं।

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