Kargil War: …जब टाइगर हिल पर वायुसेना ने दागा पहला लेजर गाइडेड बम, जानें पूरी कहानी

भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1999 में लड़े गए कारगिल युद्ध (Kargil War) में वायुसेना (Indian Air Force) दुश्मनों पर कहर बनकर टूटी थी। हमारी वायुसेना और उनके घातक लड़ाकू जहाजों ने पाकिस्तानी सैनिकों को दिन में तारे दिखा दिए थे।

Indian Air Force

भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) का लड़ाकू विमान। (फाइल फोटो)

Kargil War: टाइगर हिल समुद्र तल से 5062 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। वायुसेना (Indian Air Force) के मिराज 2000 विमानों का इस्तेमाल कर लेजर गाइडेड बमों को गिराया गया था।

भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1999 में लड़े गए कारगिल युद्ध (Kargil War) में वायुसेना (Indian Air Force) दुश्मनों पर कहर बनकर टूटी थी। हमारी वायुसेना और उनके घातक लड़ाकू जहाजों ने पाकिस्तानी सैनिकों को दिन में तारे दिखा दिए थे।

इस युद्ध में 24 जून को टाइगर हिल पर वायुसेना (Indian Air Force) ने पहला लेजर गाइडेड बम दागा था। टाइगर हिल कारगिल युद्ध में बेहद ही अहम था। इस जंग में आज भी टाइगर हिल पर इंडियन आर्मी के कब्जे को एक टर्निंग प्वाइंट के तौर पर माना जाता है। इस पर कब्जा करना कई गुना फायदा पहुंचाता है।

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वायुसेना (Indian Air Force) के जवानों ने ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के तहत टाइगर हिल पर जोरदार हवाई हमला किया। टाइगर हिल समुद्र तल से 5062 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मिराज 2000 विमानों का इस्तेमाल कर इन बम को गिराया गया था। मिराज वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े का बेहद सक्षम लड़ाकू विमान रहा है। पाकिस्तान को इस हमले से भारी नुकसान पहुंचा था।

बताया जाता है कि इस हमले में पाकिस्तान के कई घुसपैठिए मार गिराए गए थे। ये हमला अचानक ही किया गया था और दुश्मनों को भनक तक नहीं लगने दी गई थी। मिशन की निगरानी तत्कालीन वायुसेना प्रमुख अनिल यशवंत टिपनिस ने खुद ही की थी।

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बता दें कि लेजर गाइडेड तकनीकि के सहारे किए गए हमले बेहद ही सटीक होते हैं। दरअसल, हमले से पहले टारगेट पर लेजर डाली जाती है। यह बिना चूके लक्ष्य को भेदने वाला बम है, जो अपने लक्ष्य पर सीधा वार करता है। इसी तकनीकि के जरिए कारगिल में कई पाकिस्तानी बंकर उड़ाए गए थे।

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