3 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तानी एयर फोर्स ने भारत पर किया था हवाई हमला, फिर शुरू हुआ भारत-पाक युद्ध

पाकिस्तान ने वो बड़ी भूल की जिसका उसे भारी नुकसान झेलना पड़ा। भारत पर हुए हमले के साथ ही 1971 का आधिकारिक आगाज हो गया था।

Kargil War

फाइल फोटो।

पाकिस्तान (Pakistan) ने वो बड़ी भूल की जिसका उसे भारी नुकसान झेलना पड़ा। भारत पर हुए हमले के साथ ही 1971 का आधिकारिक आगाज हो गया था। 16 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तान की सेना के आत्मसमर्पण और बांग्लादेश के जन्म के साथ युद्ध का समापन हुआ।

भारत और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच 1971 में लड़े गए युद्ध की कई मुख्य वजहें थीं। पाकिस्तान का पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) पर अत्याचार, भारत में बढ़ता शरणार्थी संकट और पाकिस्तान का भारत के खिलाफ हवाई हमला करना सबसे अहम वजहों में गिना जाता है। कारगिल युद्ध में थल सेना और वायुसेना ने पाक के खिलाफ ऐसी आक्रामकता दिखाई थी जिसे याद कर आज भी दुश्मन देश कांप उठता है।

1999 में जितना अहम रोल आर्मी का था उतना ही वायुसेना का भी था। ऊंची पहाड़ियों पर दुश्मन को हराने के लिए वायुसेना का बखूबी इस्तेमाल किया जाता है। अक्सर युद्ध की स्थिति में वायुसेना की भूमिका अहम हो जाती है। 1971 में लड़े गए युद्ध में वायु सेना की भूमिका बेहद अहम थी।

पाकिस्तान युद्ध से पहले ऐसी कई बड़ी गलतियां कर बैठा कि उसे हार के साथ-साथ अपना पूरा एक प्रांत (पूर्वी पाकिस्तान) ही गंवाना पड़ गया। 3 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तानी एयर फोर्स ने भारत पर हवाई हमले किए थे। ये हमले भारत के अमृतसर और आगरा समेत कई शहरों को निशाना बनाकर किए गए।

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पाकिस्तान ने वो बड़ी भूल की जिसका उसे भारी नुकसान झेलना पड़ा। भारत पर हुए हमले के साथ ही 1971 का आधिकारिक आगाज हो गया था। 16 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तान की सेना के आत्मसमर्पण और बांग्लादेश के जन्म के साथ युद्ध का समापन हुआ।

बांग्लादेश मुक्ति के लिए लड़े गए युद्ध में हमारी आर्मी ने दुश्मनों को छठी का दूध याद दिला दिया था। पाकिस्तान के कई हजार सैनिकों ने हमारे सामने सरेंडर कर दिया था। युद्ध में हार के बाद पाकिस्तान को अपना एक प्रांत खोना पड़ा और दुनिया के नक्शे पर बांग्लादेश नाम का देश सामने आया।

कारगिल (kargil) युद्ध में थल सेना और वायुसेना ने पाक के खिलाफ ऐसी आक्रमकता दिखाई थी जिसे याद कर आज भी दुश्मन देश कांप उठता है। 1999 में जितना अहम रोल आर्मी का था उतना ही वायुसेना का भी था। ऊंची पहाड़ियों पर दुश्मन को हराने के लिए वायुसेना का बखूबी इस्तेमाल किया जाता है। अक्सर युद्ध की स्थिति में वायुसेना की भूमिका अहम हो जाती है। 1971 में लड़े गए युद्ध में वायु सेना की भूमिका बेहद अहम थी।

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