IED डिफ्यूज्ड करने में माहिर जवान ने आईईडी ब्लास्ट में ही गंवाई थी जान, मेजर चित्रेश बिष्ट को मगणोपरांत मिला ‘सेना मेडल’

‘सेना दिवस’ (Army Day) पर शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट (Major Chitresh Bisht) को मरणोपरांत ‘सेना मेडल’ से नवाजा गया। बीते साल स्वतंत्रता दिवस पर घोषित हुए वीरता पदकों की सूची में इस जांबाज का नाम शामिल था। 15 जनवरी को ‘सेना दिवस’ पर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम मे थलसेना प्रमुख (Army Chief) जनरल मनोज मुकुंद नरवाणे (Manoj Mukund Naravane) ने शहीद चित्रेश बिष्ट के पिता सुरेंद्र सिंह बिष्ट को यह मेडल सौंपा।

Major Chitresh Bisht

 

‘सेना दिवस’ (Army Day) पर शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट (Major Chitresh Bisht) को मरणोपरांत ‘सेना मेडल’ से नवाजा गया। स्वतंत्रता दिवस पर घोषित हुए वीरता पदकों की सूची में इस जांबाज का नाम शामिल था। 15 जनवरी को ‘सेना दिवस’ पर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम मे थलसेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने शहीद चित्रेश बिष्ट के पिता सुरेंद्र सिंह बिष्ट को यह मेडल सौंपा। मरणोपरांत अपने लाडले की वीरता का पदक अपने हाथ में देख पिता की आंखे जरूर नम थीं, लेकिन गर्व से सीना भी चौड़ा था। देश की हिफाजत करते हुए कुर्बान हुए इस जांबाज युवा अफसर ने देवभूमि को गौरवान्वित किया है।

आईईडी डिफ्यूज्ड करने में थे एक्सपर्ट

सेना के इंजीनियिंरग कोर में तैनात मेजर चित्रेश बिष्ट (Major Chitresh Bisht) को आईईडी डियूज्ड करने में महारथ हासिल थी। 16 फरवरी, 2019 को रजौरी के नौशेरा सेक्टर में हुए आईईडी (IED) ब्लास्ट में मेजर चित्रेश बिष्ट शहीद हो गए थे। दरअसल, आतंकियों ने एलओसी क्रॉस कर यहां पर आईईडी लगाया हुआ था। सूचना मिलने पर सैन्य टुकड़ी ने इस इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया। इमेजर बिष्ट इस बम निरोधक दस्ते की अगुआई कर रहे थे, जब आईईडी में विस्फोट हुआ। उन्होंने एक बारूदी सुरंग को तो सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया गया था। पर जब दूसरी सुरंग को निष्क्रिय कर रहे थे तभी विस्फोट हो गया। इसमें वो गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका निधन हो गया। सेना का एक और जवान भी इस ब्लास्ट में गंभीर रूप से घायल हुआ था।

पिता रह चुके हैं पुलिस में इंस्पेक्टर

शहीद मेजर चित्रेश बिष्ट (Major Chitresh Bisht) दून के ओल्ड नेहरू कॉलोनी के रहने वाले थे। मूलरूप से अल्मोड़ा जिले के रानीखेत तहसील के अंतर्गत पिपली गांव के रहने वाले मेजर चित्रेश बिष्ट का परिवार देहरादून के ओल्ड नेहरू कॉलोनी में रहता है। उनके पिता सुरेंद्र सिंह बिष्ट उत्तराखंड पुलिस से इंस्पेक्टर के पद से रिटायर हैं।

महज 28 साल की उम्र में देश पर हो गए कुर्बान

सरहद पर शहादत के समय मेजर चित्रेश बिष्ट (Major Chitresh Bisht) की उम्र महज 28 साल की थी। वे पढ़ाई में शुरू से ही बहुत अच्छे थे। भारतीय सैन्य अकादमी से सैन्य प्रशिक्षण पूरा कर वह साल, 2010 में पास आउट हुए थे। मेजर रैंक के लिए हुई परीक्षा में वे टॉप टेन में रहे थे। मेजर चित्रेश की शहादत की खबर उस समय आई थी, जब उनके घर पर उनकी शादी की तैयारियां चल रही थी। मेजर चित्रेश की शादी 7 मार्च, 2019 को होनी थी। शादी के कार्ड भी बंट चुके थे। लेकिन, इससे पहले ही दून का यह लाल देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गया।

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