बेटे के शहीद होने की खबर रात भर सीने में दबा ली, पार्थिव शरीर देख परिजनों के निकले आंसू

हम बात कर रहे हैं बीते 5 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के केरन सेक्टर में शहीद हुए बालकृष्ण की। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के पुईद गांव के रहने वाले बालकृष्ण भारतीय सेना में पैराट्रूपर थे।

Martyr Balkrishna

कई बार दुश्मनों से लोहा लेने में हमारे देश के बहादुर जवान शहीद हो जाते हैं। शहीद होने के बाद यकीनन इनके परिजनें पर गम का पहाड़ टूट पड़ता है लेकिन वो फिर भी बड़ी फख्र से शहीद का परिवार कहलाना पसंद करते हैं। आज हम बात कर रहे हैं बीते 5 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के केरन सेक्टर में शहीद हुए बालकृष्ण (Martyr Balkrishna) की। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के पुईद गांव के रहने वाले बालकृष्ण भारतीय सेना में पैराट्रूपर थे।

Martyr Balkrishna

केरन सेक्टर में सीमा पर आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शहीद होने के बाद अगली इसी दिन रात को बालकृष्ण के पिता महेंद्र सिंह को अपने 25 साल के बेटे के शहीद होने की सूचना मिली। कानों में यह खबर जाते ही उनका कलेजा छलनी हो गया। लेकिन महेंद्र सिंह गंभीर बने रहे और परिवार के सदस्यों को उस रात बेटे के शहीद होने के बारें में सूचना नहीं दी। सारी रात वो अकेले ही सीने में इस पहाड़ से गम को लिए घर में रहे और सुबह अपनी पत्नी तथा घर के अन्य सदस्यों को इस बारे में जानकारी दी।

यहां आपको बता दें कि शहीद बालकृष्ण (Martyr Balkrishna) के घर में पिता महेंद्र सिंह, माता इंद्रा देवी, दादा अनूप राम, दादी बेगमु देवी, छोटा भाई केहर सिंह और बहन सोनिया हैं। कुछ समय पहले उनकी बहन की शादी हुई थी। महेंद्र सिंह का छोटा बेटा केहर सिंह पंजाब रेजीमेंट में तैनात हैं।

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बालकृष्ण का पार्थिव शरीर 6 अप्रैल को दोपहर हेलीकॉप्टर से मनाली के निकट बाहंग स्थित सासे के हैलीपैड पर पहुंचा। इस दौरान प्रदेश सरकार की ओर से परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर हेलीपैड पर मौजूद रहे। पैतृक गांव में बालकृष्ण का पार्थिव शरीर पहुंचने के बाद वन मंत्री ने परिजनों को ढाढस बंधाया।

शहीद बालकृष्ण को 6 अप्रैल को को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। सेना की ओर से आर्थिक मदद के अलावा प्रदेश सरकार शहीद के परिजनों को 20 लाख रुपये देगी। वन मंत्री ने प्रदेश सरकार की ओर से शहीद के परिजनों को मौके पर पांच लाख रुपये प्रदान किए। कुल्लू के भूतनाथ श्मशानघाट पर वीर शहीद का अंतिम संस्कार किया गया।

शहीद बालकृष्ण (Martyr Balkrishna) के परिजनों ने बताया कि दो महीने बाद उनकी शादी होने वाली थी। जिसकी तैयारियां भी की जा रही थीं। सेना में भर्ती हुए अभी बालकृष्ण को तीन साल ही हुए थे। इसी साल 12 मार्च को छुट्टियां खत्म होने के बाद उन्होंने बटालियन ज्वॉइन किया था। आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर में हुए इस मुठभेड़ में सेना के जवानों ने 5 आतंकियों को भी मौत के घाट उतार दिया।

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