पठान थे 21 राष्ट्रीय राइफल्स के चहेते, बंधक लोगों को बचाने में लगा दी जान की बाजी

उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा में हुए एनकाउंटर (Handwara Encounter) में जम्मू-कश्मीर पुलिस (Jammu Kashmir Police) के सगीर अहमद पठान (Sageer Ahmad Pathan) उर्फ ‘काजी’ शहीद हो गए थे।

Sageer Ahmad Pathan

हंदवाड़ा में हुए एनकाउंटर में जम्मू-कश्मीर पुलिस के सगीर अहमद पठान उर्फ 'काजी' शहीद हो गए थे।

उत्तरी कश्मीर के हंदवाड़ा में हुए एनकाउंटर (Handwara Encounter) में जम्मू-कश्मीर पुलिस (Jammu Kashmir Police) के सगीर अहमद पठान (Sageer Ahmad Pathan) उर्फ ‘काजी’ शहीद हो गए थे। पठान ने बंधक बनाए गए लोगों को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी। वे जम्मू-कश्मीर पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात थे।

बहादुरी की बदौलत तीन आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिले थे: सगीर अहमद पठान कुपवाड़ा जिले के रहने वाले थे। वे इससे पहले कई एंटी टेरेरिस्ट ऑपरेशंन्स का हिस्सा रहे और कई दफा अपनी बहादुरी का परिचय दे चुके थे। इसके चलते स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) में रहते हुए उन्हें तीन आउट ऑफ टर्न प्रमोशन भी मिले थे और वे कांस्टेबल से सब इंस्पेक्टर बने।

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साल 1999 में ज्वॉइन किया था पुलिस फोर्स: सगीर अहमद पठान (Sageer Ahmad Pathan) का जन्म उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में एलओसी के पास त्राड गांव में 1978 में हुआ था। वे साल 1999 में पुलिस के आर्मर्ड विंग में भर्ती हुए थे। बतौर पुलिस कांस्टेबल उन्होंने नौकरी शुरू की थी। अलग-अलग जगहों पर तैनाती के बाद वह साल 2006 में आतंकवाद से लड़ने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (SOG) में शामिल हो गए।

मिल चुके हैं कई वीरता पदक: साहस और शौर्य के लिए सगीर अहमद पठान (Sageer Ahmad Pathan) को कई वीरता पदक मिल चुके हैं। इनमें 2009 में शेर-ए-कश्मीर पुलिस मेडल और 2011 में राष्ट्रपति द्वारा दिया गया पुलिस वीरता पदक शामिल है। इसके अलावा पठान को महानिदेशक सराहना पदक और जनरल अफसर कमांडिंग इन चीफ, उत्तरी कमान सराहना पदक से भी नवाजा गया था।

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पठान थे 21 राष्ट्रीय राइफल्स के चहेते: एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, वह “हमेशा आगे रहते थे और खतरनाक मिशन पर जाने से भी घबराते नहीं थे। उनकी बहादुरी के कारण उन्हें तीन बार तरक्की मिली। स्थानीय होने के कारण पठान 21 राष्ट्रीय राइफल्स के चहेते बन गए थे, क्योंकि कश्मीर के भीतरी हिस्सों में घुसने के लिए आतंकवादियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले रास्तों के बारे में पठान को जानकारी होती थी।”

अंतिम सांस तक लड़ते रहे: जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा, “पठान ने कई आतंकवाद निरोधी मिशन को पूरा किया। उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें तीन बार पदोन्नति दी गई थी और वह कांस्टेबल से उप निरीक्षक बन गए थे। पठान अंतिम सांस तक लड़ते रहे। उन्होंने लोगों की हितों की रक्षा करते हुए प्राण न्योछावर कर दिए।”

बता दें कि हंदवाड़ा एनकाउंटर में 21 राष्‍ट्रीय राइफल्‍स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा, मेजर अनुज सूद, नायक राजेश, लांस नायक दिनेश शहीद और जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस के सब-इंसपेक्‍टर सगीर अहमद पठान (Sageer Ahmad Pathan) शहीद हो गए थे।

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