कोरोना का कहर, CRPF ने स्थापना दिवस पर होनेवाले कार्यक्रमों को किया स्थगित

कोरोना वायरस COVID-19 संक्रमण के खतरे को देखते हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) ने 19 मार्च को अपनी वर्षगांठ पर होनेवाले सभी कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया है। हालांकि सीआरपीएफ अकादमी, कादरपुर में 19 मार्च, 2020 को अपने 81वीं एनिवर्सरी पर वरिष्ठ अधिकारी शहीदों के स्मारक पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि देंगे। 

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CRPF ने स्थापना दिवस पर होनेवाले कार्यक्रमों को किया स्थगित।

बता दें कि देश के सबसे बड़े फोर्स CRPF की स्थापना साल 1939 में हुई थी। तब से लेकर अब तक इस बल ने देश की आंतरिक सुरक्षा के साथ ही अन्य कई संवेदनशीन मोर्चों पर अपनी बहादुरी का परिचय दिया है। समय आने पर इस बल के जवान अपना बलिदान देने से भी पीछे नहीं हटे हैं।

गौरतलब है कि अपने स्थापना दिवस के अवसर पर सद्भावना और भाईचारे को बढ़ावा दोने के लिए फोर्स ने 27 फरवरी, 2020 से देश भर में एक व्यापक रक्तदान अभियान शुरू किया था। लेकिन करोना वायरस के खतरे को देखते हुए इस अभियान को रोक दिया गया। CRPF के महानिदेशक डॉ. एपी महेश्वरी के सुझाव और मार्गदर्शन से शुरू किए गए इस अभियान के तहत देश भर में भारी संख्या में लोगों ने रक्तदान किया।

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CRPF मानव रक्त के मूल्य को समझती है और इसलिए कोरोना वायरस के संक्रमण के खत्म होने की घोषणा होते ही यह अभियान फिर से शुरू किया जाएगा। CRPF के वे नायक जिन्होंने देश के खातिर अपना जीवन न्योछावर किया है, ऐसे सभी CRPF शहीदों के आश्रितों को CGHS हेल्थकेयर प्रीमियम सुविधा का विस्तार किया जाएगा। इस छूट की लागत सीआरपीएफ वहन करेगी। इसकी तैयारी चल रही है। यह उन बहादुरों के प्रियजनों के बेहतर जीवनयापन को सुनिश्चित करेगा जिन्होंने राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है।

CRPF राष्ट्र की सेवा करने वालों की सेवा करने से कभी नहीं चूकती। CRPF के परिवार में न केवल उन 2200 शहीदों के परिवार शामिल हैं, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है, बल्कि वे वीर सपूत भी हैं जिन्होंने राष्ट्र की सेवा करते हुए अपने अंग गंवाए हैं। फोर्स कृत्रिम अंग लगवाकर अपने दिव्यांग योद्धाओं की मदद करने के साथ ही उनके आत्मसम्मान को बरकरार रखने के अवसर भी उन्हें देती है।

CRPF ने हाल ही में अपने दिव्यांग नायकों के आर्थिक समावेश के लिए उनके अनुकूल विभिन्न डिजिटल, साइबर, कला और खेल जैसे क्षेत्रों में सिविल सोसाइटी के साथ समझौता किया है। फोर्स द्वारा विशिष्ट संस्थानों के साथ मिलकर इन जवानों को नए-नए स्किल्स से लैस किया जा रहा है ताकि न केवल उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके, बल्कि उनके आत्मसम्मान को भी सुनिश्चित किया जा सके।

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