CRPF का 82वां स्थापना दिवस आज, घने जंगलों से लेकर दुर्गम पहाड़ियों तक दुश्मनों को खत्म करने में हासिल है महारत

देश की सेवा में पूरी तरह समर्पित यह फोर्स पर्यावरण को लेकर कितनी सजग है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसने देशभर में 22 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य तय किया है।

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CRPF की कोबरा बटालियन को घने जंगलों में किसी ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने में महारत हासिल है। (फाइल फोटो)

देश की सबसे निडर, साहसी और बहादुर फोर्स में से एक सीआरपीएफ Central Reserve Police Force (CRPF) का आज 82वां स्थापना दिवस है। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को बल के स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे। साथ ही वह देशभर में तैनात सीआरपीएफ कर्मियों को वीडियो लिंक के जरिए संबोधित भी करेंगे। समारोह का आयोजन बल के लोधी रोड स्थित मुख्यालय में किया जाएगा।

साल 1939 में सीआरपीएफ अस्तित्व में आया था। देश की सेवा में पूरी तरह समर्पित यह फोर्स पर्यावरण को लेकर भी कितनी सजग है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसने देशभर में 22 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य तय किया है।

CRPF के चीफ एपी महेश्वरी ने इस संबंध में कहा है कि यह फोर्स देश की सेवा में अपना अमूल्य योगदान जारी रखेगी और साथ ही साथ पेड़ लगाने, पानी बचाने और सोलर प्लांट लगाने जैसे कार्यों को करते हुए पर्यावरण-फ्रेंडली माहौल खड़ा करने में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेगी। इस साल सीआरपीएफ 22 लाख पेड़ लगाकर नए कीर्तिमान स्थापित करेगी।

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27 जुलाई 1939 को CRPF का अस्तित्व सामने आया था। उस वक्त इसे Crown Representative’s Police के नाम से जाना जाता था। 28 दिसंबर 1949 को CRPF Act, आने के बाद Crown Representative’s Police, का नाम बदलकर CRPF कर दिया गया। देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारतीय संघ के तहत 1949 में इसका नाम बदलकर केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) कर दिया था।

सीआरपीएफ (CRPF) में 245 बटालियन हैं। जिसमें 5 सिंगल बटालियन, 6 महिला बटालियन, 15 आरएएफ बटालियन, 10 कोबरा बटालियन, स्पेशल ड्यूटी ग्रुप, पार्टिलयामेंट ड्यूटी ग्रुप और 05 वीआईडी सुरक्षा बटालियन भी शामिल हैं।

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सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन को घने जंगलों में किसी ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने में महारत हासिल है। 17वीं लोकसभा के चुनावों में सीआरपीएफ के जवानों ने बेहतरीन रोल अदा किया था और इन्हीं बहादुर जवानों की बदौलत यह चुनाव हिंसा-मुक्त संभव हो सका था। वर्तमान में यह इस फोर्स से जुड़े निडर जवान जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ-ईस्ट इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे हैं।

जम्मू कश्मीर में एक तरफ जहां सीआरपीएफ (CRPF) के जवान आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं तो वहीं वो यहां पत्थरबाजों से भी मुकाबला करते अक्सर नजर आते हैं। जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ के जवान, आतंकियों पर काल बनकर बरस रहे हैं। बेहतरीन कार्यकुशलता के लिए ही सीआरपीएफ के जवानों को जाना जाता है।

एक खास बात यह भी है कि कोरोना के इस दौर में सीआरपीएफ (CRPF) के जवानों ने जम्मू-कश्मीर में MADADGAR हेल्पलाइन -14411 भी शुरू की है। इसके जरिए वो लोगों से जुड़ रहे हैं और उन्हें उचित सहायता भी मुहैया करा रहे हैं। इसके अलावा यह जवान अमरनाथ यात्रा और वैष्णो देवी की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की रक्षा के लिए भी हर वक्त मुस्तैद रहते हैं।

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