छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों ने किए थे दो बड़े हमले, दहल गया था पूरा देश

नक्सली दहशत फैलाकर अपनी विचारधार का प्रसार करते हैं। नक्सली (Naxals) जिस देश में रहते हैं और जिसका खाना खाते हैं उसी के खिलाफ हैं। हमारे वीर सपूतों को अपने देश के भीतर ही नक्सलियों से लोगों की रक्षा करनी पड़ती है।

Naxal Attack

प्रतीकात्मक तस्वीर।

Naxal Attack: 2017 के मार्च महीने में नक्सलियों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) पर हमला बोला था। इस हमले में 12 जवान शहीद हो गए थे। नक्सलियों ने घात लगाकर हमारे वीर सपूतों पर हमला किया था। 

नक्सली दहशत फैलाकर अपनी विचारधार का प्रसार करते हैं। नक्सली (Naxals) जिस देश में रहते हैं और जिसका खाना खाते हैं उसी के खिलाफ हैं। हमारे वीर सपूतों को अपने देश के भीतर ही नक्सलियों से लोगों की रक्षा करनी पड़ती है। नक्सलियों ने कई मौकों पर दहशत फैलाकर अपना असली चेहरा देश के सामने रखा है।

नक्सलियों (Naxalites) को उनके गढ़ में घुसकर ढेर करना ही हमारे जवानों और सरकारों का एकमात्र मकसद है। सरकार का लक्ष्य है कि साल 2023 तक नक्सलियों का इस देश से सफाया कर दिया जाए।

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साल 2017 में नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में दो बड़े हमलों (Naxal Attack) को अंजाम दिया था। यह हमले बेहद खतरनाक थे।नक्सलियों के इन हमलों के बाद देशवासियों का खून बुरी तरह से खौल उठा था। नक्सलियों को मौत के घाट उतारने वाले हमारे पुलिस फोर्स के जवान इन हमलों में शहीद हो गए थे। नक्सली पुलिस फोर्स को निशाना बनाकर आतंक फैलाती आई है।

2017 के मार्च महीने में नक्सलियों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) पर हमला (Naxal Attack) बोला था। इस हमले में 12 जवान शहीद हो गए थे। नक्सलियों ने घात लगाकर हमारे वीर सपूतों पर हमला किया था। नक्सलियों की इस कायराना हरकत के बारे में जानकर देशवासियों के मन में नक्सलियों के लिए नफरत और ज्यादा बढ़ गई थी।

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दरअसल, इस हमले (Naxal Attack) में नक्सलियों ने आईईडी विस्फोटक (IED Blast) का इस्तेमाल किया था। आईईडी यानी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) एक तरह के बम होते हैं जो मिलिट्री के बमों से अलग तरीके से बनाए जाते हैं। इन्हें सड़क के किनारे लगाए जाने वाले बमों के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इन बमों को बहुत कामचलाऊ तरीके से बनाया जाता है। नक्सली अक्सर इस बम का इस्तेमाल कर दहशत फैला चुका हैं।

नक्सलियों ने सीआरपीएफ (CRPF) की 219वीं बटालियन के जवानों को निशाना बनाया था। जहां यह हमला हुआ था, वह स्थान राजधानी रायपुर से करीब 450 किलोमीटर दूर है। जवानों पर यह हमला भेजी गांव के पास सुकमा के घने जंगलों में हुआ था।

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इस हमले (Naxal Attack) के बाद इसी साल नक्सलियों ने अगले ही महीने यानी 24 अप्रैल के दिन सुकमा में ही एक बार फिर सीआरपीएफ जवानों को निशाना बनाया था। इसमें 25 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले में नक्सलियों ने सीआरपीएफ की 74 बटालियन की रोड-अपनिंग पार्टी को निशाना बनाया था।

सीआरपीएफ (CRPF) के इस काफिले पर हमला चिंतागुफा इलाके में हुआ था। यह इलाका बस्तर के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में आता है। 150 के करीब जवानों के दल की लोकेशन का गुप्त तरीके से पता लगा लिया था। इसके बाद करीब 300 नक्सलियों ने एकसाथ हमला बोल दिया था। गोलीबारी के दौरान कई नक्सलियों को भी मौके पर ढेर कर दिया गया था।

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घायल जवानों को वहां से बेहतर इलाज के लिए रायपुर भेजा गया। बता दें कि रोड-अपनिंग पार्टी सुरक्षा बलों का ऐसा दस्ता होता है जो सुरक्षा बालों और वीआईपी कॉन्वॉय के मूवमेंट के दौरान  आतंकवाद प्रभावित इलाकों कॉन्वॉय को  सुरक्षा प्रदान करने के लिए रोड के दोनों तरफा लगाया जाता है ।

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