LAC पर शहीद हुआ वैशाली का जांबाज जय किशोर, पिता बोले- मौका मिला तो छोटे बेटों को भी भेजेंगे फौज में

15 जून की रात चीनी सैनिकों की झड़प में बिहार के वैशाली जिले का लाल भी शहीद हो गया। 17 जून को जिले के जंदाहा थाना क्षेत्र के चकफतेह गांव के 22 साल के जांबाज बेटे सिपाही जय किशोर सिंह (Martyr Jai Kishor Singh) की शहादत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।

Martyr Jai Kishor Singh

शहीद जय किशोर सिंह (फाइल फोटो) और रोती-बिलखती शहीद की मां।

लद्दाख की गलवान घाटी (Ladakh Galwan Valley)  में 15 जून की रात चीनी सैनिकों की झड़प में बिहार के वैशाली जिले का लाल भी शहीद हो गया। 17 जून को जिले के जंदाहा थाना क्षेत्र के चकफतेह गांव के 22 साल के जांबाज बेटे सिपाही जय किशोर सिंह (Martyr Jai Kishor Singh) की शहादत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया।

घर के बाहर शहीद ( (Martyr Jai Kishor Singh) की मां मंजू देवी का रूदन दिल दहला रहा था। परिजनों की चीत्कार सुन गांव के लोग शहीद के घर पर जुट गए। अपने लाल की शहादत का गम लोगों की आंखों में साफ झलक रहा था।

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शहीद जय किशोर सिंह (Martyr Jai Kishor Singh) साल 2018 में 12 बिहार रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। अभी जय किशोर की शादी नहीं हुई थी। चार भाइयों में वे दूसरे नंबर के थे। उनके बड़े भाई नंद किशोर सिंह भी भारतीय सेना (Indian Army) में हैं। उनकी तैनाती सिक्किम में है।

जय किशेर के बाद वाले भाई शिवम कुमार ने इस साल इंटर की परीक्षा पास की है और सबसे छोटा भाई कौशल कुमार अभी नौवीं में पढ़ता है। शहीद जय किशोर की बड़ी बहन ममता की शादी हो चुकी है।

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जय किशोर (Martyr Jai Kishor Singh) ने एक महीने पहले की अपने परिजनों से बातचीत की थी। फोन पर उन्होंने बताया था कि वहां सबकुछ ठीक-ठाक है और वे भी ठीक हैं। उन्होंने यह भी बताया था कि अब उनसे बातचीत नहीं हो पाएगी, क्योंकि उनकी तैनाती लद्दाख में हो गई थी।

पिता राजकपूर सिंह बताते हैं, “एक महीना पहले फोन आया था। उसने कहा था कि ऊपर तैनाती हो रही है। वहां टावर नहीं मिलेगा तो बात नहीं हो पाएगी। जब नीचे आएगें तो बात करेंगें।”

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इसी बीच बीते 15 जून की रात लद्दाख की गलवन घाटी में चीनी सैनिकों से झड़प में जयकिशोर शहीद हो गए। 17 जून की सुबह करीब 9 बजे उसके गंभीर होने की सूचना मिली। किसान पिता राजकपूर ने बताया, “पहले बोला कि बेटा गंभीर है, तो हमने कहा कि आप लोग ठीक से इलाज कराइए। फिर 11 बजे फोन आया कि आपका बेटा शहीद हो गया। मां बाप का करेजा है तो फट गया।”

शहीद जवान (Martyr Jai Kishor Singh) के पिता राजकपूर सिंह किसान हैं। उन्होंने बताया कि जय किशोर बीते 1 मार्च को छुट्टी में घर आए थे। छुट्टी के दौरान वे देवघर समेत कई धार्मिक स्थलों पर घूमने भी गए थे। होली के एक दिन पहले 9 मार्च को ड्यूटी पर वापस लौट गए थे। पिता राजकपूर सिंह चाहते हैं कि उनके बेटे का स्मारक लगाया जाए। साथ ही उसके नाम पर कोई सार्वजनिक स्थल बनाया जाए।

वो कहते हैं, “बेटा तो चला गया, उसका गौरव रहना चाहिए। जिसको आधार बनाकर हम बूढ़ा-बूढ़ी अपना जीवन काट दें।” शहीद के पिता कपूर सिंह को अपने वीर लाल की शहादत का गम है, तो साथ ही गर्व भी है। वे कहते हैं कि अगर मौका मिला तो अपने दोनों छोटे बेटों को भी देश की सेवा के लिए फौज में भेजेंगे।

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