जन्मदिन के दिन घर पहुंचा जवान का तिरंगे में लिपटा शव

आगरा के वीर सपूत अमित चतुर्वेदी के परिवार के लिए यह दिन खुशियों वाला होता है। लेकिन देश की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमित का 3 जून को अंतिम संस्कार किया गया।

Funeral of martyr, 25th birthday, last rites, army jawan martyred in arunachal pradesh, 17 para field regiment,indian army, soldier, army jawan, agra, bisalpur, martyr, arunachal pradesh, army jawan martyred, martyred in arunachal pradesh, militant attack, army, 17 para regiment, army 17 para regiment, army regiment, field regiment, paramilitary, 17 para fd rgt, cm yogi adityanath, up cm, chief minister yogi adityanath, tribute to martyrs, amit chaturvedi, pradesh news, pm narendra modi, amit shah, up police,samajwadi party, akhilesh yadav, raja bhaiya, lord hanuman, up congress, lucknow news, priyanka gandhi, rahul gandhi

31 मई की देर शाम सर्च ऑपरेशन के दौरान मैरानी जोराट में अमित को गोली लगी। उपचार के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए।

3 जून को अमित का जन्मदिन था। आगरा के वीर सपूत अमित चतुर्वेदी के परिवार के लिए यह दिन खुशियों वाला होता है। लेकिन देश की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमित का 3 जून को अंतिम संस्कार किया गया। एक साल के भतीजे ने शहीद को मुखाग्नि दी। परिवार को सांत्वना देने के लिए वहां आए लोगों की आंखों में आंसू थे। शहीद अमित के पिता रिटायर सूबेदार रामवीर चतुर्वेदी ने बताया कि 31 मई की रात को अमित से फोन पर बात हुई थी। उसने जन्मदिन पर गांव आने के लिए रिजर्वेशन कराने की बात कही थी।

अपने जन्मदिन पर अमित घर आने का प्लान बना रहे थे। वह पूरे परिवार के साथ इस दिन खुशियां मनाना चाहते थे। मगर, 3 जून की सुबह इस बहादुर बेटे का पार्थिक शरीर तिरंगे में लिपटकर लाया। कागारौल के गांव बीसलपुर के रहने वाले अमित चतुर्वेदी के परिवार के लिए 25 साल पहले 3 जून की तारीख खुशियां लेकर आई थी। 3 जून 1994 को जुड़वा बेटे अमित और अरूण का जन्म हुआ था। लेकिन यह तारीख परिवार को गम दे गई। 25 वर्षीय अमित चतुर्वेदी सेना में सिपाही के पद पर इन दिनों असम में तैनात थे।

31 मई की देर शाम सर्च ऑपरेशन के दौरान मैरानी जोराट में उन्हें गोली लगी। उपचार के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गए। गांव में पार्थिव शरीर पहुंचते ही भारत माता के जयकारे गूंज उठे। हर आंख नम थी। युवाओं ने तिरंगा लहराकर अमित चतुर्वेदी की शहादत को सलाम किया। शहीद अमित चतुर्वेदी को अंतिम विदाई देने जनसैलाब उमड़ा। अंतिम यात्रा में वीर सपूत पर फूलों बरसाते और भारत माता के नारे लगाते हुए लोग चल रहे थे। जब अंत्येष्टि स्थल पर एक साल के भतीजे ने शहीद अमित को मुखाग्नि दी तो सबकी आंखें छलक पड़ीं।

शहीद अमित चतुर्वेदी के दो और भाई हैं। बड़े भाई सुमित और अमित के जुड़वा भाई हैं अरुण। दोनों भाई भी फौज में हैं। सुमित इन दिनों लद्दाख में तैनात है। अमित असोम में थे। जुड़वा भाई अरुण की तैनाती देहरादून में है। पिता को बहादुर बेटे अमित को खोने का गम है लेकिन उसकी शहादत पर गर्व भी है। सात दिन पहले ही अमति की शादी तय हुई थी। घर में खुशी का माहौल था, लेकिन अब पूरे गांव में गमगीन माहौल हो गया है।

यह भी पढ़ें: छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों को मिली बड़ी कामयाबी, नक्सलियों की साजिश नाकाम

यह भी पढ़ें