अफ़ज़ल बारामुला डिग्री कॉलेज में बीए फर्स्ट ईयर का छात्र था। कई बार दोस्तों के साथ पत्थरबाज़ी में शरीक होता था। मज़ा आता था उसको दोस्तों के साथ नारे लगाने में और पत्थर फेंकने में। पर ये सब करने की वजह शायद उसको खुद मालूम नहीं थी।

अफ़ज़ल बारामुला डिग्री कॉलेज में बीए फर्स्ट ईयर का छात्र था। कई बार दोस्तों के साथ पत्थरबाज़ी में शरीक होता था। मज़ा आता था उसको दोस्तों के साथ नारे लगाने में और पत्थर फेंकने में। पर ये सब करने की वजह शायद उसको खुद मालूम नहीं थी।

दिन भर शाज़िया सिर्फ़ हूजेफ़ा को ख़त्म करवाने का प्लान बनाती। अविनाश नहीं चाहता था कि शाज़िया के घर में एनकाउंटर हो लेकिन शाजिया को तो जैसे कोई भी डर नहीं था। बस एक जुनून था उसके सिर पर।

मेजर भूपेंद्र की एक साल पहले ही उस इलाक़े में पोस्टिंग हुई थी। राष्ट्रीय राइफल्स में अल्फा कंपनी कमांडर। उनकी कंपनी बारामुला और हंडवारा के बीच एक छोटे से गांव तरागपोरा में पिछले कई सालों से तैनात थी।

मेजर भूपेंद्र की एक साल पहले ही उस इलाक़े में पोस्टिंग हुई थी। राष्ट्रीय राइफल्स में अल्फा कंपनी कमांडर। उनकी कंपनी बारामुला और हंडवारा के बीच एक छोटे से गांव तरागपोरा में पिछले कई सालों से तैनात थी।

वो अक्सर इम्तियाज़ को दिया हुआ ईमेल चेक करता है। उसे पता है कि इम्तियाज़ शहीद हो चुका है, पर फिर भी उसके दिल में कहीं एक छोटी सी उम्मीद है और उस छोटी सी उम्मीद के साथ-साथ एक बहुत बड़ा बोझ भी।

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