युद्ध में भारत के 1300 से ज्यादा जवान घायल हुए थे। पाक सेना को भारत से कहीं ज्यादा नुकसान हुआ। उसने अपने सैनिकों की लाशें लेने से भी इनकार कर दिया था।

युद्ध के दौरान इंडियन एयर फोर्स ने दुश्मनों का सफाया करने के लिए ऑपरेशन 'सफेद सागर' चलाया था। उस दौरान मिग-27 के अलावा मिग 21 का भी इस्तेमाल किया गया था।

'ऑपरेशन विजय' के दौरान, सिपाही अशुली माओ नागा रेजीमेंट का हिस्सा था, जिसने द्रास सेक्टर में स्थित 'ब्लैक टूथ' पर हमला किया था।

हवलदार के पद से रिटायर हुए सैनिक राजेश ढुल ने कारगिल की लड़ाई में दुश्मन से लोहा लिया था। उन्होंने बताया कि युद्ध के दौरान उनका काम माइंस बिछाने का था।

परमवीर चक्र विजेता सूबेदार संजय कुमार ने बताया कि मुश्किल हालात से निपटने के लिए सेना ने युद्ध में एक खास ट्रिक 'साइलेंट मूवमेंट' का इस्तेमाल किया था।

25 नवंबर 1987 को 'ऑपरेशन पवन' के दौरान जब महार रेजिमेंट की आठवीं बटालियन के मेजर रामास्वामी परमेश्वरन श्रीलंका में एक तलाशी अभियान से लौट रहे थे।

पाक की इस हरकत का जवाब सेना ने बखूबी दिया। करीब 40 दिन चले युद्ध में दुश्मनों को भगा-भगाकर मारा। युद्ध में एक जवान थे जिन्होंने दुश्मनों को नेस्तनाबूद किया।

जब्त हथियारों में 7.62 एमएम एमजी 1ए गन मशीन शामिल हैं। इसके अलावा द्रास सेक्‍टर में पाक सैनिकों ने रॉ‍केट लॉन्‍चर (आरपीजी 7) का भी इस्तेमाल किया था।

युद्ध में जीत दिलाने के लिए भारत के कई जवानों ने जान की कुर्बानी दी। इनमें एक नाम बिहार रेजिमेंट के हवलदार रतन सिंह का भी है।

युद्ध को जीतने के लिए सेना ने कई ऑपरेशन लॉन्च किए थे जिसके बाद द्रास से लेकर टरटोक तक सेना तिरंग लहरकार वापस लौटी। सेना के सैनिकों ने शानदार युद्ध किया था।

कारगिल युद्ध से जुड़ी कई ऐसी बातें जिनके बारे में आपको जानना चाहिए। इस युद्ध में लद्दाख के युवाओं ने भी सेना की खूब मदद की थी।

भारतीय जवानों को दुश्मन आराम से चढ़ाई करते हुए देख सकते थे। भारतीय जवानों को करीब एक किलोमीटर ऊंचे पहाड़ पर खड़ी चढ़ाई करनी थी।

युद्ध के दौरान फोर्स ने दुश्मनों का सफाया करने के लिए ऑपरेशन 'सफेद सागर' चलाया था। उस दौरान भारत के पास मिग 21, मिग 23 और मिग 27 जैसे लड़ाकू विमान थे।

एनसीसीस को 1942 में ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा स्थापित विश्वविद्यालय अधिकारी प्रशिक्षण कोर के उत्तराधिकारी के रूप में माना जा सकता है।

अबतक कई एनसीसी कैडेट ने सेना में भर्ती होकर देश का नाम रोशन किया है। एनसीसी कैडेट रहीं और फिर एयरफोर्स में अधिकारी रैंक पर तैनात हुईं।

एनसीसी का लक्ष्य छात्रों को समाज के अच्छे नागरिक बनाने और उन्हें जीवन के प्रत्येक क्षेत्र मे योग्य और अग्रणी बनाना है। आजादी के बाद 15 जुलाई, 1948 को देश की तीनों सेना को मजबूती प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय कैडेट कोर की स्थापना की गई थी।

ऑपरेशन के दौरान सेना को बड़ी कामयाबी हाथ लगी और एक साथ तीन आतंकवादी को मौके पर ही ढेर कर दिया गया। सेना ने काउंटर ऑपरेशन में आतंकियों को मार गिराया।

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