सेना में 9 कुमाऊं रेजिमेंट का हिस्सा रहे और 1965 के भारत पाकिस्तान यु़द्ध में शामिल रहे रिटायर्ड जगत सिंह ने इस युद्ध से जुड़े अपने अनुभव को साझा किया है।

युद्ध में पाक सेना के खिलाफ जवानों ने शौर्य का परिचय दिया। पाक को हराकर भारतीय जवानों ने दिखा दिया था कि हमारे खिलाफ नजर उठाने वालों के साथ क्या होता है।

Indo-China War of 1962: बंदी बनाए जाने के बाद उन्हें किस तरह का अनुभव महसूस हुआ था इसका जिक्र उन्होंने अपनी किताब 'हिमालयन ब्लंडर' में किया है।

Kargil War: खत अरबी भाषा में लिखा गया था। खत में जिक्र किया गया था कि कादिर घर पर छुट्टियां मना रहे थे लेकिन अचानक युद्ध छिड़ जाने के बाद उन्हें जाना पड़ा था।

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल मोहिंदर पुरी ने एक न्यूज वेबसाइट से बातचीत में इस पोस्ट पर किस तरह टू राजपूताना ब्रिगेड ने कब्जा किया था इसका जिक्र किया है।

सेना दिवस के उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष दिल्ली छावनी के करिअप्पा परेड ग्राउंड में परेड निकाली जाती है, जिसकी सलामी थल सेनाध्यक्ष लेते हैं।

हमला पैटन टैंक के साथ किया गया था। कश्मीर के चार ऊंचाई वाले इलाके पीरपंजाल, गुलमर्ग, उरी और बारामूला पर कब्जे के लिए इस ऑपरेशन को चलाया था।

War of 1965: पाक के पास पैटन टैंक थे जबकि भारत के पास पुराने। असल उत्तर की जंग में पाक के 97 टैंक नष्ट हुए जिनमें 72 पैटन थे। भारत के केवल 30 टैंक ही युद्ध में नष्ट हुए।

सेना ने इस युद्ध में ऐसा पराक्रम दिखाया था जिसके चलते सिर्फ 13 दिन में ही यह जंग खत्म हो गई थी। इस जंग में 91000 पाक युद्धबंदी कैद कर भारत लाए गए थे।

घायल चश्मदीदों के मुताबिक पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा की लाश पर नक्सलियों ने जमकर तमाशा किया था। नक्सली लाश पर घेर बनाकर काफी देर तक नाचते रहे थे।

बीते 10 साल की बात करें तो 8 अक्टूबर 2009 के दिन महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में लाहिड़ी पुलिस थाने पर नक्सली हमले में हमारे 17 जवान शहीद हो गए थे।

War of 1965: पाकिस्तान का यह सोचना कि भारत 1962 में चीन के खिलाफ युद्ध में उतरकर हार चुका है। ऐसे में भारतीय सेना हर तरफ से कमजोर है। ये भूल उसे भारी पड़ी।

सिर्फ 910 किलो मीटर के क्षेत्र को ही पाकिस्तान को सौंपा गया था। 30 जून 1965 को कच्छ सिंध समझौता के तहत ये जमीन पाक को सौंपी गई तो उसके तेवर और बढ़ गए।

War of 1971: वाइस एयर मार्शल चंदन सिंह राठौड़ वे शख्स थे जिन्होंने सेना की दो कंपनियों को एक रात में ही मेघना नदी के पार उतार कर इतिहास रच दिया था।

Kargil War: दो सैनिक एक हथियार को अपने-अपने कंधे पर ढोते थे। हथियार ढोना इतना आसान भी नहीं था क्योंकि कारगिल की ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी रहती है।

Kargil War 1999: पाकिस्तानी घुसपैठिए कारगिल के कुछ चरवाहों को अपनी गिरफ्त में लेने की प्लानिंग कर रहे थे लेकिन उन्होंने किसी कारण ऐसा नहीं किया।

Kargil War 1999: गुपचुप तरीके से घुसपैठ को अंजाम देना का मकसद सियाचिन से भारत को अलग-थलग करना था। भारत ने 1984 में सियाचिन पर कब्जा कर लिया था।

यह भी पढ़ें