हस्तक्षेप एपिसोड नंबर 11: कांग्रेस से अलग हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया, क्या है भविष्य?

हस्तक्षेप एपिसोड नंबर 11:-

यह सत्य है कि सरकारें विधायकों के बहुमत से बनती हैं और चलती हैं, लेकिन सत्ता की लड़ाई में ऐसी भी सरकारें बन जाती हैं जिनके पास बहुमत होता तो है, मगर उसके प्रदर्शन की ताकत नहीं रहती। ऐसी सरकारें बहुमत का ढिंढोरा पीटती हैं, लेकिन असल में वे खतरे के पायदान पर खड़ी रहती हैं। मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। सरकार बहुमत से बनी है और जैसे-तैसे चल भी रही है, पर उसकी स्थिरता का भरोसा किसी को नहीं है। सरकार के प्रबंधकों को भी यह भरोसा शायद ही हो कि सरकार पांच साल के लिए स्थिर है। पिछले एक सप्ताह के घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि कमलनाथ सरकार का भविष्य अनिश्चित है। उसे अपनी सुरक्षा के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। सरकार रहेगी या जाएगी, यह राज्यसभा चुनाव में ही तय हो जाएगा।

ज्योतिरादित्य माधवराव सिंंधिया (Jyotiraditya Madhavrao Scindia) के कांग्रेस से अलग होने से पूरे मध्यप्रदेश में प्रशासनिक गलियारों से लेकर स्वशासी दफ्तरों तक ,हाई प्रोफाइल अधिकारियों से लेकर आम कर्मचारियों तक,व्यवसायियों से लेकर राजनैतिक व्यक्तित्व तक सभी इस बात को लेकर चिंतनशील है, की मध्य प्रदेश की सरकार इन परिस्थितियों में कैसे स्थाई रूप से 5 साल तक टिक पाएगी। 

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