हस्तक्षेप एपिसोड नंबर 4: कोटा के अस्पताल में बच्चों की मौत पर सियासी नजरिया

India China Clashes

बीबीसी के पूर्व संपादक संजीव श्रीवास्तव का भारत-चीन के मौजूदा हालात पर बेबाक राय। India China Border Tension

हस्तक्षेप एपिसोड नंबर 4:- राजस्थान के जेके लोन (JK Lon) अस्पताल में बच्चों की मौत पर राजनीति कितनी वाजिब

राजस्थान के कोटा के जेके लोन (JK Lon) अस्पताल में नवजात शिशुओं की मौत ने एक बार फिर से भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। इसी के साथ देश के तमाम राजनीतिक पार्टियों को एक दूसरे पर हमला बोलने का मौका मिल गया है। पिछले काफी समय से NRC-CAA पर घिरी केंद्र की बीजेपी सरकार कोटा में बच्चों की मौत के बाद कांग्रेस पर हमलावर हो गई है। तो वहीं कांग्रेस सरकार ने इसके लिए पिछली सरकार पर निशाना साधा है। क्योंकि जेके लोन (JK Lon) अस्पताल को अपग्रेड करने के लिए काफी समय से यहां के प्रशासन ने राज्य सरकार को आवेदन भेजा था लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। 

 

 

इस घटना के बाद जेके लोन (JK Lon) अस्पताल का दौरा करके लौटे राजस्थान के उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि हमारी सरकार को सत्ता में आये हुए एक साल हो गए हैं, ऐसे में कुछ जिम्मेदारी हमें भी लेनी चाहिए। सचिन पायलट के इस बयान के बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने पीड्ब्लूडी मंत्री यानि की सचिन पायलट पर ही आरोप लगाने लगे हैं। ऐसे में राजस्थान की सत्ता में काबिज कांग्रेस सरकार कोटा की घटना के बाद दो खेमे में बंटती दिखाई दे रही है। 

कांग्रेस की इस लड़ाई का फायदा उठाते हुए राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष ने कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष की तारिफ करते हुए कह दिया कि जब कांग्रेस के नेता खुद विपक्ष का काम कर रहे हैं तो बीजेपी को ज्यादा बोलने की जरूरत नहीं है।

कांग्रेस-बीजेपी के बीच सत्ता की इस लड़ाई में मूल मुद्दा बहुत पीछे छूट जाता है। भारत जैसे विकासशील देश के लिए इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोटा के घटना के कुछ घंटों बाद ही गुजरात के राजकोट और अहमदाबाद में भी बड़ी संख्या में बच्चों की मौत खबर में है। गोरखपुर में दशकों से बच्चों की दर्दनाक मौत हमेशा से सुर्खियों में रही है। ऐसे में राजस्थान सरकार को इस घटना से सीख लेते हुए अपनी बुनियादी स्वास्थय सुविधाओं को सुदृढ़ करना चाहिए जिससे की ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो।

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