हस्तक्षेप एपिसोड नंबर 5: केजरीवाल के व्यक्तित्व में आए बदलाव पर सियासी नजरिया

हस्तक्षेप एपिसोड नंबर 4:- दिल्ली चुनावों से पहले आए एक सर्वे में ये बताया गया है कि आगामी विधानसभा चुनावों में दिल्ली की जनता फिर से अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) को दिल्ली की गद्दी सौंपने जा रही है।

8 फरवरी को होने वाली दिल्ली के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला देखने को मिलेगा। लेकिन चुनाव से पहले आये एक सर्वे ने अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की पार्टी को दोबारा से बहुमत की सरकार बनाने की बात बताई है। भारतीय राजनीति में अरविंद केजरीवाल भी उन नेताओं में शूमार हो गए हैं जिन्होंने संघर्ष और आंदोलन की राजनीति करके सत्ता की कुर्सी तक का सफर तय किया है। 

 

धरना कुमार के नाम से मशहूर रहे केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की व्यक्तित्व में अब मंझे हुए राजनेताओं की झलक देखने को मिल रही है। भारतीय राजनीति में खास, अनुठी और उत्कृष्ठ व्यक्तित्व के तौर पर उभर कर सामने आए हैं। इससे पहले 70-80 के दशक में लोहिया आयोग, आपातकाल और अगड़ी-पिछड़ी की राजनीति करके लालू प्रसाद यादव और मुलायम सिंह यादव राजनीति में आए थे, उसके बाद दलितों की राजनीति करने वाले कांशी राम की छत्रछाया में रहते हुए मायावती का राजनीति में पदार्पण भी ऐसी ही राजनीति से हुआ, कांग्रेस नेता रही ममता बेनर्जी ने जुझारू व्यक्तित्व के दम पर अपनी एक अलग पहचान बनाई और फिर खुद की पार्टी बनाकर देश की राजनीति में मजबूत ओहदे को हासिल किया। जबकि अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, स्टैलिन, नवीन पटनायक, चौटाला बंधु आदि राजनीतिक वंशजों की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने अन्ना आंदोलन के कंधो पर चढ़कर अपनी पहचान बनाई और फिर उससे अलग होकर अपने दम-खम पर आम आदमी पार्टी का गठन किया। दिल्ली की गद्दी संभालने के बाद अरविंद केजरीवाल ने अपनी पार्टी की संभावनाओं को दिल्ली से बाहर भी आजमाने की कोशिश की लेकिन वहां मिली विफलता ने उनको फिर से पूरी तरह दिल्ली में केंद्रीत कर दिया है।

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