जंगल में खून-खराबे के बीच कैसे पनपी दो नक्सलियों की प्रेम कहानी?

love story of naxalites

राम माडकामी उर्फ दिनेश… कभी ओडिशा के मल्कानगिरी इलाके के जंगलों में इसकी तूती बोलती थी। वजह थी इसके हाथ में मौजूद हथियार और इसके नाम के आगे लगा नक्सली शब्द। कालीमेड़ा पुलिस स्टेशन के कुरुबा गांव के रहने वाले राम माडकामी उर्फ दिनेश को उसके खूंखार कारनामों के लिए जाना जाता था।

कुछ ऐसा ही हाल था चित्रकोंडा थाने के कुटनीपदर गांव की रहने वाली पूर्णिमा का। दोनों एक ही नक्सल कमांडर के अंडर में नक्सली गतिविधियों को अंजाम देते थे। पर, खानाबदोश ज़िंदगी जीते-जीते जाने कब इनके भीतर प्यार का अंकूर फूटा, इन्हें पता ही नहीं चला।

और जब पता चला तो नई मुश्किल शुरू हो गई। पहला डर अपने आकाओं और साथियों का था तो दूसरा पुलिस और पैरा मिलिट्री के जवानों का। हुआ वही जिसका डर था। जब इनके कमांडर को इनके संबंध के बारे में पता चला, तो इन्हें समझाया-बुझाया गया। जब नहीं माने तो धमकी दी गई, लेकिन इन्होंने अपना रास्ता चुन लिया था। किसी के समझाने का इन पर असर नहीं होना था।

फिर दोनों ने पुलिस को सरेंडर किया। जिसके बाद मल्कानगिरी के एसपी की अगुवाई में रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम के तहत धूमधाम से इनकी शादी करवा दी गई। आज ये दोनों पूर्व नक्सली सिक्योरिटी गार्ड हैं और सुख चैन की जिंदगी जी रहे हैं।

वीडियो में देखिए इनकी कहानी-

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