पुरानी मान्यताओं को तोड़ कर आगे बढ़ रहा आदिवासी समाज

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झारखंड का गिरीडीह जिला, जिसका नाम हमेशा नक्सली हिंसा के लिए जाना जाता था। जहां के वातावरण में प्रेम नहीं बल्कि बारूद और शोले दिखाई देते थे, आज उस गिरीडीह की फिज़ा बदल रही है। अब यहां आदिवासी समाज हिंसक संगठनों के बहकावे से बहुत दूर होता दिख रहा है। जहां यह क्षेत्र आज तरक्की की राह में समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रहा है तो वहीं समाज द्वारा प्रचलित मान्यताओं को तोड़ कर आपसी सहमति से अंतरजातीय विवाह के रस्म में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिल रही है।

कुछ ऐसा ही गिरीडीह जिले के पंकज कुमार दास और पुष्‍पा कुमारी के साथ हुआ था। इन दोनों के बचपन का प्‍यार लगभग तीन वर्ष पूर्व एक मंदिर में शादी के बंधन में बंधकर सम्पन्न हुआ था। पुष्पा सदर प्रखंड के अजीडीह गांव की निवासी हैं और पंकज कुमार दास भोरंडीहा के निवासी हैं। दोनों ने दुखिया महादेव मंदिर में सात फेरे लेकर वैवाहिक जीवन में कदम रखा था। दोनों ने मैट्रिक की पढ़ाई साथ में की है। पढ़ाई के दौरान दोनों में प्रेम हो गया था जो आगे चलकर अपनी मंज़िल पर पहुंचा। दोनों आदिवासी समाज के अलग-अलग जाति से हैं। अलग जातियों से होने के कारण शादी होना आसान नहीं था। आदिवासी समाज की मान्यताएं बहुत ही कठोर होती हैं। लेकिन प्रेम में वो ताक़त होती है जो न जाति देखती है और ना समाज।

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घर वालों को शुरुआत में ये रिश्ता पसंद नहीं था। हर तरफ से अड़चनें आईं। लेकिन दोनों ने साथ जीने और मरने की ठान ली थी। दोनों मोहब्बत में एक दूसरे के प्रति ईमानदार थे। आख़िरकार इनके मोहब्बत की जीत हुई। एक वक़्त के सभी लोग बाद इस रिश्ते को मान गए। वैवाहिक कार्यक्रम में दोनों गांव के सैकड़ों लोग शामिल हुए। पारम्परिक नाच-गाने हुए। सभी ने खूब मौज मस्‍ती की। सभी ने वर-वधू को आशीर्वाद दिया।

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