किसी विचारधारा नहीं बल्कि नक्सल नेताओं की मर्जी से चल रहे संगठन

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नक्सलियों के शहरी नेटवर्क की जिम्मेदारी संभालने वाले दंपति नन्दू उर्फ विवेक और उसकी पत्नी सती उर्फ कमला उर्फ कोमल कुमेंटी ने 13 फरवरी को आईजी रतनलाला डांगी के सामने सरेंडर कर दिया था। दोनों पर सरकार ने कुल 13 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था। सरेंडर नक्सली दंपति नक्सलियों के बड़े कैडरों के गार्ड के रूप में भी काम कर चुके हैं। दोनों नौ नक्सल घटनाओं में भी शामिल रहे हैं। नन्दू नागपुर में अपने कॉलेज के दिनों में नक्सल संगठन से जुड़ा था। जबकि उसकी पत्नी सती ने 2009 में नक्सल संगठन की सदस्यता ली थी। उन्होंने संगठन के शीर्ष नेताओं की मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना सहित नक्सल संगठन के भटक चुके विचारधारा से परेशान होकर सरेंडर करने की बात स्वीकार किया।

ये दोनों नागपुर में रहकर नक्सलियों के शहरी नेटवर्क को सम्भाल रहे थे। इस नक्सल दंपति को जंगल-वार का प्रशिक्षण भी दिया गया था। वे नक्सल संगठन के बड़े कैडरों के गार्ड की जिम्मेदारी भी संभालते थे। उन्होंने बताया कि कुछ सालों से वे नागपुर में रहकर गढ़चिरौली, दर्रेकसा, बालाघाट सहित छग के बार्डर इलाके में नक्सलियों के लिए शहर से सभी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराते थे। वे जंगल में रहने वाले गुरिल्ला पार्टी के लिए कुरियर का काम करते थे।

नन्दू उर्फ विवेक उर्फ बंटी मांगपुरा नागपुर है। वह  2004 में नक्सल संगठन से जुड़ा था। तब वह कॉलेज में था और क्रांतिकारी भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे महापुरुषों को आदर्श मानकर छात्र राजनीति में सक्रिय था।  इसी दौरान उसकी मुलाकात भाकपा माओवादी नेताओं से हुई और वह नक्सल संगठन का हिस्सा बन गया। नक्सल संगठन के बड़े कैडर एमएमसी जोन इंचार्ज दीपक उर्फ मिलिंद का करीबी रहा और गार्ड के रूप में भी काम किया। उसने संगठन से 2009 में जुड़ी सती उर्फ कमला उर्फ कोमल से शादी की।

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कुछ समय बाद उसने देखा कि संगठन में विचारधारा नाम की कोई चीज नहीं है। जिन गरीब, आदिवासी व कमजोर वर्ग के लिए उसने लड़ाई शुरू की थी, बड़े नक्सली नेता उन्हीं का शोषण कर रहे थे। इससे उसका मन बदलने लगा। नक्सल दंपति ने बताया कि गढ़चिरौली इलाके में नक्सल निर्दोष ग्रामीणों को शिकार बना रहे हैं। हाल ही में गढ़चिरौली में 8 ग्रामीणों की हत्या कर दी गई। इनमें एक उसकी भाभी का भाई था। जिसे न पुलिस से कोई लेना -देना था और न ही नक्सलियों से। फिर भी नक्सलियों ने उसकी हत्या कर दहशत फैलाने का काम किया।

सती उर्फ कमला ने बताया कि संगठन में स्थानीय आदिवासियों का सिर्फ शोषण होता है। आंध्र प्रदेश के बड़े नक्सली नेता मौज करते हैं। हम अपील करते हैं कि हमारी तरह दूसरे साथी भी आकर सरेंडर कर दें। स्थानीय नक्सलियों के हिस्से में सिर्फ नुकसान ही है। संगठन किसी विचारधारा नहीं बल्कि नक्सल नेताओं की मर्जी से चल रहा है।

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