मासूमों को बनाता था नक्सली, अब पुलिस के सामने उगल रहा साथियों का राज

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इस खूंखार शख्स के सिर पर सरकार ने 15 लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा था। खून-खराबा मचाना, लेवी वसूलना और दूसरों की जायदाद हड़प लेना इसका मुख्य पेशा था। इसने झारखंड के कई जिलों में लाल आतंक का ऐसा खौफ मचा रखा था कि उसका नाम सुनते ही लोग माथे पर आया पसीना पोछना भूल जाते थे। आज हम बात कर रहे हैं करीब 150 गंभीर नक्सली वारदातों को अंजाम देने वाले खूंखार नक्सली नकुल यादव की। चतरा के कुंदा थाना क्षेत्र के जूहिया गांव के रहने वाले नकुल ने लोहरदगा, गुमला और चतरा समेत कई जिलों में एक से बढ़कर एक घिनौने कारनामों को अंजाम दिया है। कहा जाता है कि करोड़ों रुपए की लेवी वसूलने के अलावा नकुल झारखंड के गांवों में रहने वाले बच्चों को जबरदस्ती नक्सली संगठन में भर्ती करने का काम भी करता था। इतना ही नहीं अगर कोई उसके हुक्म की तौहीन करता तो नकुल उसे बेरहमी से कत्ल कर डालता था।

बिशुनपुर में एक आदिवासी परिवार ने जब अपने बच्चे को उसे सौंपने और नक्सली संगठन में शामिल करने से इनकार कर दिया तो नकुल ने पिता के सामने ही उस बच्चे को जिंदा जला दिया था। झारखंड पुलिस का रिकॉर्ड बताता है कि नकुल पर गुमला, लोहरदगा, लातेहार, पलामू और रांची में कुल 144 गंभीर वारदातों में शामिल रहा। साल 2011 में सेन्हा थाना क्षेत्र के धरधरिया में पहाड़ पर 195 विस्फोटों में 11 पुलिसकर्मियों की हत्या और 60 से अधिक पुलिसकर्मियों के घायल होने के पीछे नकुल ही था। साल 2014 में उसने बगड़ू थाना क्षेत्र के चैनपुर और पुतरार गांव से तीन ग्रामीणों का अपहरण कर लिया था। उन पर पुलिस की मुखबिर का आरोप लगाते हुए उसने उन्हें पीट-पीट कर मार डाला था।

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सुदूर गांवों में उसकी धमक और लोगों के दिलों में उसके नाम के खौफ का ही परिणाम था कि उसके आकाओं ने उसे संगठन में रीजनल कमांडर का बड़ा ओहदा भी दिया था। नकुल बेरहम होने के अलावा बेहद ही अवसरवादी नक्सली नेता भी रहा। 24 साल तक नक्सली संगठन में रहकर उसने बंदूक के दम पर अपने फायदे के लिए ना जाने कितनी जिंदगियां तबाह कीं और कई लोगों की गाढ़ी कमाई लूट ली। लेकिन कहते हैं कि अपराध के पांव ज्यादा मजबूत नहीं होते। नकुल की करतूतों से आजिज आ चुकी पुलिस ने आखिरकार उसका नाम अपनी हिट लिस्ट में डाल दिया। पुलिस अब इस बेखौफ नक्सली को जिंदा या मुर्दा किसी भी सूरत में पकड़ना चाहती थी।

नकुल पर नकेल कसने के लिए जब झारखंड पुलिस की टीम ने बीहड़ों में दबिश बढ़ाई तो इस दुर्जन अपराधी के होश उड़ गए। उसे लगने लगा कि उसके दिन अब गिनती के ही बचे हैं। बीहड़ो में दुबका बैठा नकुल पुलिस की कार्रवाई से डर गया और उसे अब अपनी जान का खौफ सताने लगा। हालांकि, कुछ दिनों तक तो वो पुलिस से आंख-मिचौली खेलता रहा लेकिन जब उसे कहीं से कोई रास्ता नहीं समझ आया तो उसने पुलिस के सामने हथियार डालने का फैसला लिया। नकुल ने अपनी जान बचाने की खातिर पुलिस और खुफिया अधिकारियों से धीरे-धीरे संपर्क साधना शुरू किया और फिर आखिरकार उसने 4 मई, 2017 को पुलिस के सामने घुटने टेक दिए। आत्मसमर्पण करने के बाद उसे सरकार की पुनर्वास योजना का लाभ भी मिला। अभी जेल में बंद यह नक्सली धीरे-धीरे पुलिस के सामने अपने साथी नक्सलियों के कई अहम राज उगल रहा है।

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नकुल ने उगले साथियों के राज: सरेंडर करने के बाद नकुल ने पुलिस को कई खुफिया जानकारी दी। नकुल की निशानदेही पर पुलिस ने लोहरदगा और गुमला के कई इलाकों में छापेमारी अभियान चलाया। इस दौरान पुलिस ने नक्सल ठिकानों से एक एलएमजी, एक एके-47, एक SLR, 3 इंसास, 6 रायफल, 7 वॉकी टॉकी, 3347 राउंड कारतूस, 32 मैगजीन, 10 बंडल कोडेक्स वायर और 20 थान काला सूती कपड़ा सहित अन्य सामान बरामद किए हैं। उसने पोलित ब्यूरो के सदस्य किशन दा, मिसिर बेसरा, सेंट्रल कमेटी सदस्य देव कुमार सिंह, सुधाकरण, प्रयाग उर्फ विवेक, स्पेशल एरिया कमेटी के सौरव यादव उर्फ मारकस बाबा, साकेत उर्फ वीरसइत, सुधाकरण की पत्नी नीलिमा, उमेश उर्फ राधेश्याम, गौतम पासवान और जया उर्फ चिंता जैसे बड़े नक्सलियों की जानकारी पुलिस को दी।

करोड़ों का मालिक है नकुल: नकुल के सरेंडर के बाद यह भी पता चला कि 24 साल तक बंदूक के दम पर लूट-खसोट मचाने वाले इस दुर्दांत ने करोड़ों की संपत्ति अर्जित की है। खास बात यह है कि उसने यह संपत्ति अपनी पत्नी और भाई के नाम पर जमा की है। इनमें चतरा के कुंदा व प्रतापपुर में स्थित 27 एकड़ जमीन के अलावा मैकलुस्कीगंज में 10 डिसमिल जमीन, मैकलुस्कीगंज में भाई रोहित यादव के नाम पर बनवाया गया एक करोड़ का मकान, पत्नी के नाम बैंक में जमा 10 लाख रुपए, भाई के बैंक खाते में जमा 61 लाख रुपए और पांच जेसीबी शामिल हैं। नकुल के पास 16 एकड़ जमीन है जबकि उसके पिता के नाम से प्रतापपुर में पांच एकड़ जमीन अलग से है। घर में ट्रैक्टर भी है।

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अंग्रेजी स्कूल में पढ़ता है बेटा: नक्सली नकुल का बेटा विकास यादव रांची के एक बड़े अंग्रेजी स्कूल में पढ़ता है। इतना ही नहीं नकुल का पूरा परिवार पढ़ा-लिखा है। बड़ी बेटी यशोदा देवी कोलकाता में बिजनेस करती है। दूसरी बेटी नीला देवी का पति अमित यादव और ससुर राजकिशोर यादव भी बैंक में नौकरी करते हैं। तीसरी बेटी उत्तम देवी का पति आनंद यादव रेलवे में ड्राइवर है। उसका भाई महाराज यादव एक स्कूल में पारा शिक्षक है। दूसरा भाई चंद्रेश्वर किसान है तो तीसरा लालदेव यादव बड़ा ठेकेदार है।

डॉक्टर बनना चाहता था नकुल: पुलिस के सामने हथियार डालने वाले नकुल ने कभी लोहरदगा और गुमला इलाके में 36 बच्चों को जबरदस्ती अपने दस्ते में शामिल किया था। मासूमों से उनका बचपन छीनने वाले कुख्यात ने पुलिस को बताया कि वो खुद बचपन में इंजीनियर, सरकारी सेवक या फिर डॉक्टर बनने के सपने देखता था। उसने पुलिस के सामने अपनी कहानी बयां करते हुए बताया कि नक्सलवाद उसका धर्म नहीं रहा है। उसने बताया कि बचपन में उसके गांव के महाजन ने उसकी पुश्तैनी जमीन हड़प ली। पुलिस और न्याय के दरवाजे पर उसे न्याय नहीं मिला। महाजनों के खिलाफ बदले की भावना और परिवार की आर्थिक हालातों ने उसे बंदूक उठाने पर मजबूर कर दिया।

बहरहाल, एक हार्डकोर माओवादी जो झारखंड के विभिन्न जिलों में हिंसा का पर्याय और पुलिस के लिए सिर का दर्द बन चुका था और जिसने झारखंड में नक्सलवाद को बढ़ावा देने और झारखंड से बाहर इस हिंसक विचारधारा को स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई उसके सरेंडर करने के बाद पुलिस ने भी अब राहत की सांस ली है। नकुल के साथ उसके एक साथी मदन यादव ने भी पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। मदन के सिर पर भी 500,000 रुपया का इनाम था। नकुल और उसका साथी मदन यादव बड़े नक्सली नेता थे। दोनों भाकपा माओवादी के शीर्ष नेताओं के चहेते थे। नकुल यादव रीजनल कमांडर और मदन यादव जोनल कमांडर था।

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