‘गांव व जिले का बागी रहा हूं, देश का नहीं…’

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‘हमने हथियार छोड़े हैं चलाना नहीं भूले हैं’ ये कहना है उस शख़्स का जिसके नाम पे कभी दहशत और ख़ौफ़ का इतिहास लिखा जाता था। बीहड़ में दशकों तक जिसकी तूती बोलती थी। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं पूर्व डाकू मलखान सिंह का। एक समय में बीहड़ में आतंक का पर्याय रहे डकैत मलखान सिंह भले ही अपनी बंदूक छोड़ चुके हों लेकिन पुलवामा हमले (Pulwama Attack) से वे इतने आहत हुए हैं कि उन्होंने ऐलान किया है कि सरकार यदि अनुमति दे तो हम पाकिस्तान को धूल चटा देंगे।

मलखान सिंह ने ये बात पुलवामा में हुए आतंकी हमले के उपरांत कही। मलखान सिंह चाहते हैं कि सरकार उन्हें और बाक़ी के बचे लगभग सात सौ बाग़ी जो मध्यप्रदेश में हैं, उन्हें बिना किसी शर्त एवं वेतन के सरहद पर भेज दे ताकि वे वहां जाकर पाकिस्तान को धूल चटा दें। कभी पुलिस के लिए सिरदर्द रहे डकैत मलखान सिंह का कहना है कि अगर इसमें हम पीछे हट गए तो हमारा नाम मलखान सिंह नहीं। हम चाहते हैं कि हमें बॉर्डर पर भेजा जाए।

मलखान सिंह ने ये भी कहा कि इनसे लिखवा लिया जाए कि अगर ये मारे भी जाएं तो कोई जुर्म नहीं। बाक़ी का बचा हुआ जीवन ये देश के नाम कुर्बान करने को तैयार हैं। पूर्व दस्यु मलखान सिंह से जब पूछा गया कि कितनों को मारेंगे तो उन्होंने जवाब दिया कि हम अनाड़ी नहीं हैं। हमने 15 साल तक चम्बल घाटी में कोई कथा नहीं बांची है। जो होगा, देखा जाएगा लेकिन मलखान सिंह पीछे नहीं हटेगा। मां भवानी की कृपा रही, तो मलखान सिंह का कुछ नहीं बिगड़ेगा। हां, पाकिस्तान को जरूर धूल चटा दूंगा। उसको उसकी औकात दिखा दूंगा। गांव व जिले का बागी रहा हूं, देश का नहीं। हमारी योजना बहुत पक्की रहेगी, इसलिए हम चाहते हैं कि हमें बॉर्डर पर भेज दिया जाए।

पूर्व डाकू मलखान सिंह पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देने कानपुर आए हुए थे। उन्होंने कहा कि चुनाव होंगे और होते रहेंगे लेकिन पुलवामा में हुए आतंकी हमले का बदला जरूर लेना चाहिए। अगर कश्मीर पर फैसला नहीं लिया गया तो कोई भी राजनीति पर विश्वास नहीं करेगा। पुलवामा में सैनिकों के शहीद होने से हमारा खून खौल रहा है।

पूर्व दस्यु सरगना ने 1982 में मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के शासन-काल में आत्मसमर्पण किया था। यह आत्मसमर्पण इंदिरा गांधी की परमीशन पर हुआ था। समर्पण के समय ऐलान किया था कि यदि कोई महिला कह दे कि मलखान सिंह ने उसके साथ किसी घटना को अंजाम दिया है तो मुझे मंच के सामने फांसी पर लटका दो।

उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि बीहड़ में मेरा इतिहास साफ सुथरा रहा है। ऐसे महात्मा जो अपने आप को बड़े सच्चे बताते हैं, उनका इतिहास भी वैसा नहीं रहा जैसा बागियों का रहा है। बागियों का इतिहास ठोस रहा है। तमाम साधु तो घेरे में आ चुके हैं। कुछ तो जेल में पड़े हुए हैं लेकिन कोई बागी ऐसा नहीं है। मलखान सिंह ने साफ कहा कि तमाम लोग मेरे बारे में कहते हैं कि तमाम कत्ल किये, कई डकैती डाली, लेकिन वह सब झूठे हैं। मेरे साथ जो अन्याय हुआ, उसको लेकर हमने एक से लड़ाई लड़ी, दुनिया से नहीं। हम बागी हैं लेकिन देश के बागी कभी नहीं हुए।

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