नक्सल दंपति ने किया सरेंडर, दोनों ही संगठन में रह चुके हैं कमांडर

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माओवादी दलम के कमांडर दंपति ने अदिलाबाद के निर्मल जिला पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों ही आदिवासी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। 32 साल की गोंड आदिवासी पेंडुर गंगाबाई उर्फ ​​लता अदिलाबाद जिले के ममदा मंडल के बरगुपल्ली की रहने वाली है। जबकि उसका पति 30 साल का मदकम सुनील छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले का है। जिला पुलिस अधीक्षक सी शशिधर राजू द्वारा किए गए निरंतर प्रयासों की वजह से आखिरकार दोनों ने हथियार डाल दिए।

गंगाबाई ऊर्फ लता पुलिस पर फायरिंग के कई मामलों में शामिल थी। वह नक्सलियों के क्रांतिकारी सोच से प्रभावित होकर कोंड्रालपेट और सिरकिला दलम में साल 2000 में शामिल हुई थी। 2004 में उसका ट्रांसफर छत्तीसगढ़ कर दिया गया। जहां वह माओवादियों की नवगठित वन-कंपनी की सदस्य बन गई। वहां उसे .303 राइफल चलाने को दिया गया। 2007 में लता को सहायक कमांडर बनाया गया और 2009 में उसे दलम के कमांडर के रूप में प्रोमोट कर दिया गया। उस वक्त उसे खून-खराबे के लिए इंसास जैसै खतरनाक हथियार दिए गए थे। तब वह शादीशुदा थी। अपने पति तिरुपति की मृत्यु के बाद उसने 2013 में सुनील से शादी कर लिया और 2016 में उसका एक बच्चा हुआ।

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सुनील 2005 में छत्तीसगढ़ के नक्सल आंदोलन में शामिल हुआ था। तब वह आठवीं कक्षा में था।  सलवा जुडूम के कार्यकर्ताओं ने उनके घर को जला दिया था। जिसका बदला लेने के लिए वह नक्सली संगठन में शामिल हुआ। 2006 में वह इंद्रावती दलम में शामिल हुआ और उसे नेलनार दलम का सहायक कमांडर बना दिया गया। आगे चलकर उसे दलम का कमांडर बना दिया गया।

उन्होंने बाकी नक्सलियों से भी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की। इन दोनों की तरह ही कई और नक्सली धीरे-धीरे खून-खराबे की जिंदगी से दूर हो रहे हैं। ऐसी जिंदगी से तंग आकर वे भी आत्मसमर्पण कर रहे हैं।

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