गालिब एक पैगाम है कि अफजल के घर भी पैदा नहीं हुआ अफजल

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गालिब डॉक्टर बन मानवता की सेवा करना चाहता है। अपने परिवार, अपनी मां और अपने नाना का नाम समाज में ऊंचा करना चाहता है। वह बहुत ही संजीदा इंसान है। बेहद मासूम दिखने वाले गालिब को उसकी मां ने नकारात्मकता और बुजदिली भरी सोच से बचा कर रखा है। आप सोच रहे होंगे कि ये गलिब है कौन। हम बात कर रहे हैं गालिब गुरू की। जी हां, गालिब गुरू, अफजल गुरू का बेटा। संसद हमले का मास्टरमाइंड अफजल गुरु, वही अफजल गुरू जिसे संसद हमले में दोषी पाए जाने पर फंसी की सजा हुई थी। उसी अफजल गुरु का बेटा राह से भटके लोगों को आईना दिखा रहा है। अफजल के बेटे गालिब गुरु को भारतीय होने पर गर्व है। अपना आधार कार्ड बनने पर वह बहुत खुश है। वह उत्साहित है कि अब उसका भारतीय पासपोर्ट भी बन जाएगा।

गालिब ने बताया कि उसे अपनी पहचान साबित करने के लिए आधार कार्ड मिल चुका है। अगर उसे पासपोर्ट भी मिल जाता है तो वह अपने आप को भारत का गौरवान्वित नागरिक महसूस करेगा। जिसके जरिए उसे अपना भविष्य संवारने के भी कई अवसर मिलेंगे। गालिब 10वीं बोर्ड में मेरिट-लिस्ट में शामिल था। उसने जम्मू-कश्मीर बोर्ड में 10वीं के एग्‍जाम में 95 फीसदी नंबर हासिल किए थे। जबकि 12वीं की परीक्षा में गालिब को 88.2 फीसदी अंक हासिल हुए हैं। दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में अच्छे अंक लाने वाला होनहार गालिब अब मेडिकल प्रवेश परीक्षा (नीट) की तैयारी कर रहा है। यह परीक्षा 5 मई को होनी है।

अठारह साल के गालिब को हाल ही में आधार कार्ड मिला है। उसका कहना है कि अब उसके पास अपनी पहचान साबित करने के लिए आधार कार्ड है। उसने अब पासपोर्ट के लिए आवदेन किया है। गालिब का कहना है कि उसका सपना है कि वह भारत के ही किसी मेडिकल कॉलेज से मेडिकल की पढ़ाई करे। लेकिन अगर उसे भारत में मेडिकल में प्रवेश नहीं मिला तो वह विदेश जाकर मेडिकल की पढ़ाई करना चाहता है। विदेश जाकर मेडिकल की पढ़ाई करने और विदेशी विश्वविद्यालय से छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए उसे भारतीय पासपोर्ट की जरूरत है। गालिब ने बताया कि तुर्की के एक कॉलेज से उसे स्कॉलरशिप भी मिल सकती है।

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बर्फ से ढ़के गुलशनाबाद की पहाड़ियों पर बसे अपने घर में गालिब अपने नाना गुलाम मुहम्मद और मां तबस्सुम के साथ रहता है। वह कश्मीर की नई पीढ़ी को हिंसा से दूर बेहतर भविष्य की राह दिखा रहा है। गालिब कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहता है ताकि लोगों की सेवा कर सके। गौरतलब है कि 2001 के संसद पमले में दोषी अफजल गुरू को 9 फरवरी 2013 को फांसा पर लटका दिया गया था। अफजल को फांसी होने के बाद उसकी पत्नी तबस्सुम ने कहा था कि अब हमारा परिवार शांति से जीना चाहता है। यह भी कहा था कि उनका बेटा डॉक्टर बनना चाहता है। उस समय गालिब ने भी कहा था कि जब भी मैं तिहाड़ जेल में अपने पिता से मिलता था तो वह मुझसे कहते थे कि तुम्हें डॉक्टर बनना होगा। गालिब ने कहा कि उसके पिता शेर-ए-कश्मीर इंस्टीटयूट आफ मेडिकल सांइसेस में उसे मेडिकल की पढ़ाई कराना चाहते थे।

गालिब का कहना है कि उसकी मां उसकी प्राथमिकता हैं। लोग क्या कहते हैं इसपर उसने कभी भी नहीं सोचा। उसकी मां ने उसे उन आतंकी संगठनों से बचाया है जो उसके जैसे युवाओं को हथियार उठाने के लिए भड़काते हैं। गालिब बताता है कि उनके पिता अफजल गुरु को फांसी होने के बाद घाटी में सक्रिय आतंकी संगठनों ने उन्हें पिता की मौत का बदला लेने के लिए बहुत उकसाया था। उनका माइंड वॉश करने का कई बार प्रयास किया गया। इन संगठनों का मकसद गालिब को आतंकी बनाकर भारत के खिलाफ प्रयोग करने का था। गालिब ने बताया कि हमने पूर्व में हुई गलतियों से बहुत कुछ सीखा है। इसलिए वह आतंकियों के जाल से बच गए। इसका क्रेडिट वह अपनी मां को देता है। गालिब के अनुसार उसकी मां ने उसे आतंकवादी बनने से बचा लिया।

वह कहता है कि मां ने मेरे लिए अलग जगह बनाई। वे कहती हैं कि अगर तुम्हें कोई कुछ कहता भी है तो उसपर कोई भी प्रतिक्रिया मत दो, चुप रहो। उसकी मां और नाना का कहना है कि उनका परिवार कश्मीर मुद्दे पर किसी भी बहस में भाग नहीं लेता है। नाना भी उपने नाती की मेहनत और सफलता से बहुत खुश हैं। उन हें पूरी उम्मीद है कि वह एक सफल डॉक्टर बनेगा।

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गालिब और उसकी मां अलगाववादियों के मुंह पर जोरदार तमाचा हैं। गालिब एक पैगाम की तरह है कि खुद अफजल के घर भी अफजल पैदा नहीं हुआ। पाकिस्तान के षड्यंत्र का शिकार बन अफजल गुरु ने न केवल जान गंवाई बल्कि अपने पीछे अपने परिवार को संघर्ष करने छोड़ गया। अपने पिता के बारे में गालिब अधिक बात नहीं करना चाहता है।

गालिब का कहना है कि जिस गांव में मैं रहता हूं वहां पर हर समय सुरक्षाबल तैनात रहते हैं। पर आज तक किसी ने कभी भी परेशान नहीं किया। कई बार सुरक्षाबलों से मिलता हूं। वे हर बार प्रोत्साहित करते हैं। वे कहते हैं कि यदि मैं मेडिकल की पढ़ाई करना चाहता हूं तो वह कभी मेरे या मेरे परिवार में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। वे खुद मुझे डॉक्टर बनने के लिए कहते हैं।

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