नक्सल प्रभावित इलाके के इन बच्चों की जिंदगी में दस्तक दे रहा नया सवेरा

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झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के नक्सल प्रभावित गांवों में रहने वाले 11 बच्चों का नवोदय विद्यालय के लिए चयन हुआ है। साल 2019 में जवाहर नवोदय विद्यालय, जमशेदपुर में कक्षा छह में नामांकन के लिए चयनित होने वाले 80 छात्रों में से 11 छात्र पटमदा, बोड़ाम, कमलपुर, जादूगोड़ा व एमजीएम जैसे नक्सल प्रभावित गांवों के हैं। उल्लेखनीय है कि नवोदय विद्यालय में एक बच्चे की पढ़ाई करने के लिए सरकार 9 से 10 लाख रुपये खर्च करती है। अब इन 11 बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा भी सरकार का होगा।

पटमदा प्रखंड के गोबरघुसी पंचायत के लोढ़ाईडुंगरी गांव में आदिवासी सबर समुदाय के लोग रहते हैं। ऐसे पिछड़े और नक्सलग्रस्त गांव में चौथी और पांचवीं क्लास के छात्रों को नवोदय विद्यालय में प्रवेश दिलाने के लिए फ्री कोचिंग सेंटर की शुरूआत 10 दिसंबर, 2018 को की गई थी। झारखंड पुलिस एसोसिएशन जमशेदपुर शाखा के तत्कालीन सचिव संतोष महतो व टैलेंट सर्च एकाडमी के अध्यक्ष हराधन महतो के नेतृत्व में यह अकादमी बच्चों को नवोदय विद्यालय में प्रवेश परीक्षा के लिए गाइड करने के लिए शुरू की गई। इनके योगदान और कोशिश से ही इन बच्चों का चयन हो पाया है और इन्हें नवोदय विद्यालय जैसे प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ने और अपना भविष्य संवारने का मौका मिला है।

नवोदय विद्यालय का पूरा नाम जवाहर नवोदय विद्यालय है। जवाहर नवोदय विद्यालय अथवा नवोदय विद्यालय भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा चलाई जाने वाली पूरी तरह से आवासीय, सह शिक्षा, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, नई दिल्ली से संबद्ध शिक्षण परियोजना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-1986 के अन्तर्गत ऐसे आवासीय विद्यालयों की स्थापना की गई और जवाहर नवोदय विद्यालय का नाम दिया गया, जो ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे लाने का प्रयास करता है। इसका प्रमुख लक्ष्य गांव-गांव तक बेहतर शिक्षा पहुंचाना है। ये विद्यालय पूर्णतः आवासीय एवं निःशुल्क विद्यालय होते हैं।

यहां विद्यार्थियों को नि:शुल्क आवास, भोजन, शिक्षण सामग्री, शिक्षा और खेल-कूद सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। हर जिले में एक नवोदय विद्यालय होता है। नवोदय विद्यालय में प्रवेश, जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा के माध्यम से लिए जाते हैं। प्रवेश हेतु कक्षा 5 के विद्यार्थियों के लिये प्रवेश परीक्षा होती है और प्रत्येक जिले से 80 छात्रों का चयन किया जाता है। इन चयनित बच्चों का दाखिला कक्षा 6 में होता है। इन विद्यालयों में कक्षा 8 तक शिक्षा का माध्यम मातृभाषा अथवा क्षेत्रीय भाषा है और इसके बाद गणित और विज्ञान के लिए अंग्रेज़ी माध्यम और सामाजिक विज्ञान के लिए हिन्दी माध्यम हैं। नवोदय विद्यालयों में 75 प्रतिशत ग्रामीण और 25 प्रतिशत शहरी बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। ये बच्चे छठवीं से बारहवीं तक इस विद्यालय में शिक्षा पाते हैं।

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