′सौभाग्य′ ने बदली नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की किस्मत, आदिवासियों की जिंदगी में उजाला

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छत्तीसगढ़ के बस्तर डिविजन के अधिकांश इलाके ऐसे थे, जहां बिजली के तार तक नहीं पहुंच पाए थे। बस्तर, सरगुजा संभाग सहित कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पहाड़, घने जंगल आदि बिजली के तार ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने में आड़े आ रहे थे। क्योंकि एक तो यहां की भौगोलिक स्थिति विषम, ऊपर से नक्सल ग्रस्त। नक्सलियों की हिंसा इन इलाकों के विकास में सबसे बड़ी बाधा थी। वे हमेशा से विकास की राह में रोड़ा रहे हैं। बिजली नहीं होने के कारण ग्रामीण भीषण गर्मी झेलने को मजबूर थे। बच्चे रात को पढ़ाई नहीं कर सकते थे। खेती के कार्य भी बिजली के बिना बड़े मुश्किल थे। पर इन परेशानियों से गांव वालों को अब निजात मिल गई है।

सरकार और प्रशासन की निरंतर कोशिशों के बाद आज नक्सल प्रभावित इलाकों की सूरत बदल गई है। क्षेत्र के विकास में तमाम सरकारी योजनाओं का योगदान है। प्रधानमंत्री ने हर घर को बिजली देने की घोषणा करते हुए सौभाग्य योजना का ऐलान किया था। इस योजना के तहत गरीबों को मुफ्त में बिजली के कनेक्शन दिए जाएंगे। इस योजना का पूरा नाम ‘प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना’ है। इस योजना के तहत 31 मार्च, 2019 तक हर घर में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के जीवन में सुधार के सपने को अब यह ′सौभाग्य योजना′ पूरा कर रही है।

राज्य के दूर-दराज इलाकों में जो धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र हैं, वहां के 11,886 घरों में पिछले साल तक बिजली पहुंच गई। साथ ही इन घरों को बिजली के उपकरण जैसे एलईडी बल्ब, पंखे आदि मुफ्त दिए गए हैं। 200 वॉट क्षमता के सौर संयंत्र के साथ 5 उच्च क्षमता की एलईडी लाइट्स, 15 वॉट का पंखा, मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट और टीवी सॉकेट इन परिवारों को निशुल्क उपलब्ध कराई गई है। घरों में बिजली आने से बच्चों की पढ़ाई-लिखाई से लेकर रोजमर्रा की जिंदगी बहुत ही आसान हो गई है। गांवों में बिजली पहुंच जाने से लोग रात में भी अपने काम आसानी से निपटा सकते हैं। बिजली आने से गांव वालों के हथकरघा उद्योग में भी काफी इजाफा हुआ है। टोकनी, झाड़ू आदि बनाने का इनका काम तेजी से बढ़ा है।

इस योजना को राज्य सरकार के ऊर्जा विभाग के तहत छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी, क्रेडा (CREDA-Chhattisgarh Renewable Energy Development Agency) लागू करती है। एजेंसी की सर्वे टीम हर जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर रिपोर्ट बनाती है। जिसके अनुसार बिजली विभाग ग्रामीण आदिवासियों के घरों तक बिजली पहुंचाने का काम करता है। क्रेडा द्वारा इन सभी सौर संयंत्रों की लगातार मानिटरिंग की जाती है और हर क्लस्टर में अलग-अलग इकाइयों द्वारा इन सभी संयंत्रों का रख-रखाव किया जाता है। क्रेडा के अधिकारियों के अनुसार, नक्सल प्रभावित जिलों के दूरस्थ घरों में बिजली पहुंचाना एक चुनौतीभरा कार्य था। ऐसे इलाकों में बिजली नहीं पहुंची थी। क्षेत्र के ग्रामीण एवं आदिवासी परिवार अंधेरे में जीवन जीने के लिए मजबूर थे।

25 सितंबर, 2017 को जब घर-घर बिजली पहुंचाने के लिए ‘सौभाग्य योजना’ शुरू हुई थी तो पता नहीं था कि यह योजना नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ जैसे सूबे के आदिवासी गांव वालों के लिए वरदान बन जाएगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस योजना को कामयाब बनाने के लिए ‘बिजली तिहार’ यानी ‘बिजली त्योहार’ मनाना शुरू किया। लोगों को प्रोत्साहन देने के लिए न केवल गांवों में शिविर लगाए बल्कि बिजली विभाग ने 100 फीसदी बिजली कनेक्शन वाले गांवों में बिजली तिहार का आयोजन भी किया। इस योजना में बिजली कनेक्शन लेने वाले ग्रामीणों के साथ ही ग्राम पंचायत के प्रमुख को प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया।

यही वजह है कि योजना शुरू होने के दो महीने से भी कम समय में राज्य के डेढ़ लाख घरों में बिजली पहुंच गई। यह योजना की कामयाबी ही है कि जिन गांवों के लोगों ने कभी बिजली नहीं देखी, अब उनका गांव रोशन हो रहा है। ये ऐसे गांव और घर हैं, जहां बिजली ले जाना दुरूह काम था। इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ में 6,24,000 घरों को बिजली कनेक्शन देने के लिए चिह्नित किया गया था। वैसे, सरकार ने राज्य के सभी बिना बिजली वाले घरों में बिजली पहुंचाने के लिए सितंबर, 2018 का लक्ष्य रखा था।

′सौभाग्य योजना′ के तहत खर्च का 60 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार वहन करती है, 10 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार देती है और शेष 30 प्रतिशत खर्च वितरण कंपनियां उठाती हैं। केंद्र ने पूरे देश में योजना को पूरा करने का लक्ष्य मार्च, 2019 तय किया, लेकिन योजना में शामिल सभी घरों के विद्युतीकरण का काम दिसंबर, 2018 में पूरा होने पर केंद्र सरकार स्वीकृत योजना की 15 प्रतिशत राशि अतिरिक्त अनुदान के रूप में राज्यों को उपलब्ध कराने का प्रावधान रखा।

′सौभाग्य योजना′ के अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे रह रहे (बीपीएल) परिवारों को मुफ्त में बिजली कनेक्शन दिए जाने का प्रावधान है। इस योजना का लाभ गरीबी रेखा से ऊपर के परिवारों (एपीएल) को भी मिल सकेगा। लेकिन ऐसे परिवार के घरों में बिजली कनेक्शन पहुंचाने के लिए 500 रुपए शुल्क देना होता है, जिसे दस किस्तों में चुकाने की सुविधा दी जाती है। इसका मतलब है हर महीने 50 रुपए किस्त के रूप में चुकाने होंगे। ‘सौभाग्य योजना’ की वजह से नक्सलियों के गढ़ के रूप में जाने जाने वाले बस्तर के अबूझमाड़ के गांव अब सोलर लाइट से जगमगा रहे हैं।

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