नक्सल समस्या के लिए कुख्यात दंतेवाड़ा की नई पहचान, नम्रता जैन ने रचा इतिहास

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नक्सली हमलों और नक्सलियों के गढ़ के रूप में कुख्यात रहे छत्तीसगढ़ के बस्तर की पहचान अब बदल रही है। इस पहचान को बदलने में बड़ी भूमिका निभा रहा है यहां का युवा। ऐसी ही एक युवा हैं नम्रता जैन। नम्रता दक्षिणी बस्तर के गीदम कस्बे की रहने वाली हैं। वह जगह जहां अगस्त 2003 में नक्सलियों ने हमला कर एक एएसआई समेत 3 जवानों की हत्या कर दी थी। साथ ही थाने को भी लूट लिया था। वहीं, दिसंबर 2011 में नव निर्मित थाना भवन को ब्लास्ट से उड़ा दिया। ऐसी खबरों के लिए कुख्यात इस छोटे से कस्बे में जन्मी और पली-बढ़ी नम्रता जैन ने यूपीएससी की परीक्षा में चयनित होकर आईपीएस बनने का गौरव हासिल किया है। साथ ही, इसकी पहचान में एक नई पहचान जोड़ दी है।

नम्रता जैन का बचपन से ही सपना था कि उन्हें सिविल सर्विस में जाना है। 2017 में उनका यह सपना साकार हो गया। जिले के अशांत गीदम शहर में पढ़ाई करने वाली नम्रता ने 1,099 सफल उम्मीदवारों में 99वीं रैंक लाकर इतिहास रच दिया।

हाईस्कूल तक निर्मल निकेतन स्कूल, दंतेवाड़ा में पढ़ने के बाद नम्रता को आगे की पढ़ाई के लिए भिलाई भेजने को परिवार राजी नहीं था। पर मां की मदद से वह बाहर निकल सकीं। मां किरण जैन ने किसी तरह घर वालों को उनकी आगे की पढ़ाई के लिए राजी किया, तब जाकर उनका घर से बाहर निकलना संभव हुआ। नतीजतन, भिलाई में हायर सेकंड्री और शंकराचार्य इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। वह भिलाई में 5 साल तक रहीं। इंजीनियरिंग की परीक्षा पास करते ही बैंगलोर में हुंडई कंपनी में अच्छे पैकेज पर नौकरी मिल गई। पर नम्रता ने अच्छी खासी सैलरी वाली नौकरी को छोड़कर आईएएस बनने के लिए संघर्ष की राह चुनी। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने 3 साल तक दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी की।

गीदम की यह बिटिया रिजल्ट्स के बाद जब घर पहुंची थीं तो उनका जोरदार स्वागत हुआ था। नम्रता के स्वागत के लिए न केवल परिजन बल्कि शहरवासी उमड़ पड़े थे। सब लोग भावुक थे। होते भी क्यों ना उनकी बिटिया ने उनके इलाके को नई पहचान जो दे दी थी।

नम्रता ने बताया कि आईपीएस बनने का सफर उनके लिए कतई आसान नहीं था। उन्होंने कहा, दंतेवाड़ा काफी पिछड़ा होने के कारण इस क्षेत्र की बेटियां खुद को बेहद कमजोर मानती हैं, जबकि मेरा मानना है कि यहां की बेटियों में बहुत प्रतिभा है। कमी है तो सिर्फ सही मार्गदर्शन और संसाधनों की।

                 मुख्यमंत्री रमन सिंह के साथ नम्रता

उन्होंने दिल्ली और दंतेवाड़ा की तुलना करते हुए कहा कि दिल्लीवासियों को दंतेवाड़ा और दंतेवाड़ा के रहने वालों को दिल्ली काफी दहशत भरा लगता है, जबकि दोनों ही शहरों में दहशत जैसी कोई बात नहीं है। मुझे गर्व है कि मैं गीदम जैसे छोटे शहर की हूं। दंतेवाड़ा में अब बहुत कुछ बदल रहा है। शिक्षा को लेकर बेहतर प्रयास हो रहे हैं, जो पहले नहीं हुआ करते थे।

बतौर आईपीएस अधिकारी नम्रता नक्सल समस्या का समाधान खोजना चाहती हैं। नम्रता ने कहा कि उनकी इच्छा बस्तर की सबसे बड़ी समस्या का समाधान खोजने में सरकार की मदद करने और बस्तर में ही रहकर काम करने की है। उन्होंने कहा कि मैंने बचपन से ही यहां हिंसा का माहौल देखा है। इस जगह ने ही मुझे आईपीएस बनने के लिए इंस्पायर किया।

छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह उस वक्त जापान के आधिकारिक दौरे पर थे। उन्होंने जापान के ओसाका से ही नम्रता की सफलता पर उन्हें बधाई दी थी। उन्‍होंने फेसबुक पर नम्रता की तस्‍वीर पोस्‍ट करते हुए अपने बधाई संदेश में लिखा कि “दंतेवाड़ा की नम्रता का आईपीएस के लिए चयन होना इस क्षेत्र में नए युग के सूर्योदय का संकेत है। शाबाश नम्रता! आपने न सिर्फ अपने माता-पिता बल्कि पूरे प्रदेश का मान बढ़ाया है। आपकी सफलता पर हम सभी को गर्व है। दक्षिण बस्तर में एजुकेशन सिटी जैसे नवाचार और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रशासन की मेहनत से इन परीक्षाओं के लिए अब उचित माहौल बना है।”

हमारी तरफ से भी नम्रता जैन को ढेरों मुबारकबाद!

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