15 लाख के इनामी को जिंदा या मुर्दा पकड़ना चाहती है पुलिस, घरवाले लौटने की लगा रहे फरियाद

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पुलिस इस कुख्यात को जिंदा या मुर्दा किसी भी सूरत में पकड़ना चाहती है। ‘लाल आतंक’ के साए में रहते-रहते वो आतंक का सिरमौर बन गया है। कई गंभीर नक्सली वारदातों को अंजाम देने वाले इस खूंखार के सिर पर पुलिस ने 15 लाख रुपए का इनाम भी घोषित कर दिया है। समाज की मुख्यधारा से टूटकर या यूं कहें कि बिछड़ कर यह प्रदीप सिंह चेरो आज झारखंड की बीहड़ों में छिपा बैठा है। प्रदीप सिंह वही खतरनाक नक्सली है जिसने अपने गांव के कुछ दबंगों से बदला लेने के लिए बंदूक थामी और इस सनक में उसने कई निर्दोष लोगों को भी मौत के घाट उतार दिया। झारखंड के लातेहार जिला के खालसा बरियातू में प्रदीप सिंह चेरो का परिवार रहता है और यकीन मानिए परिवार को अब भी आस है कि उनके घर का सदस्य एक दिन जरूर मुख्यधारा में लौट कर वापस आएगा। क्या कहना है उसके घर वालों का और उसके घर वाले उससे क्या फरियाद लगा रहे हैं? यह हम आपको आगे बताएंगे। सबसे पहले यह जान लीजिए कि नक्सली बनने के बाद प्रदीप सिंह ने कैसे आतंक मचा रखा है।
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नक्सली प्रदीप सिंह चेरो
बात साल 2011 की है तब तक प्रदीप सिंह ने नक्सलियों का चोला नहीं पहना था। घर में प्रदीप सिंह की भतीजी की शादी थी और बारात के दिन गांव के ही कुछ दबंगों से बारातियों की कहासुनी हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर दबंगों ने प्रदीप सिंह और उसके घरवालों की जमकर पिटाई कर दी। इसके बाद प्रदीप सिंह ने इन दबंगों से बदला लेने की प्रतिज्ञा ली और बिना कुछ सोचे-समझे वो नक्सलियों के रास्ते पर चल पड़ा। प्रदीप सिंह लातेहार के खूंखार नक्सलियों से जा मिला और उसने बंदूक थाम ली। इसके बाद प्रदीप सिंह ने साल 2012 में गांव के दबंगों को गोलियों से भून डाला।
नक्सली संगठन के लिए उसने कई निर्दोष लोगों को मारा। साल 2013 में उसने संगठन के लिए लेवी, अपहरण, हत्या जैसे कई संगीन वारदातों को अंजाम दिया। लातेहार के सुदूर ग्रामीण इलाकों में प्रदीप सिंह चेरो की आज तूती बोलती है और लोग उसकी बेरहमी से खौफ खाते हैं। संगठन में गहरी पैठ बनाने के बाद उसके आकाओं ने उसे जोनल कमांडर बना दिया। आज प्रदीप सिंह पुलिस की हिट लिस्ट में शुमार है और पुलिस उसे किसी भी कीमत पर पकड़ना चाहती है।
पुलिस ने कराया माता-पिता का इलाज
नक्सली कमांडर प्रदीप सिंह चेरो का छोटा भाई महाराष्ट्र में दिहाड़ी मजदूर का काम करता है और थोड़े-बहुत पैसे बचाकर घर भी भेजता है। साल 2018 में प्रदीप सिंह के पिता भूपेंद्र सिंह चेरो और उसकी मां प्रियंका देवी की तबियत काफी खराब हो गई। उस वक्त लातेहार पुलिस ने ही मानवता की मिसाल पेश करते हुए इन दोनों का इलाज अस्पताल में कराया था।
भूपेंद्र सिंह खेतों में साग-सब्जियां उपजाते हैं और उनकी पत्नी प्रियंका देवी पास के बाजार में इन सब्जियों को बेचने का काम करती हैं। घर की माली हालत ठीक नहीं है और माता-पिता अपने बड़े बेटे प्रदीप सिंह चेरो से जरा भी खुश नहीं हैं। माता-पिता का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि प्रदीप उनके बुढ़ापे की लाठी बनेगा लेकिन अफसोस कि ऐसा हो नहीं सका। नक्सली बनने के बाद प्रदीप सिंह कभी अपने माता-पिता को पूछता तक नहीं।
नर्क हो गई पत्नी की जिंदगी
प्रदीप सिंह चेरो के एक गलत फैसले से उसकी पत्नी पुनीता देवी की पूरी जिंदगी ही नर्क बन गई है। पुनीता देवी का कहना है कि बहुत साल पहले वो एक बार कर्म डी के जंगलों में प्रदीप से मिली थीं। उस वक्त भी उन्होंने प्रदीप से कहा था कि वो मुख्यधारा में लौट आए। लेकिन वो नहीं माना। पुनीता देवी का कहना है कि अगर उनके पति मुख्यधारा में लौट आते तो शायद उनकी जिंदगी ऐसी ना होती। प्रदीप सिंह चेरो के घर में उसके छोटे भाई की पत्नी सरोजनी देवी भी रहती हैं और उनका भी यही मानना है कि नक्सली रास्ते पर चलकर प्रदीप ना सिर्फ अपने परिवार से बिछड़ गया है बल्कि समाज से भी वो बिल्कुल अलग-थलग पड़ गया है। अब तो उन्हें इस बात का डर भी सता रहा है कि जिस प्रदीप को वापस लाने के लिए परिवार और प्रशासन लगातार कोशिश कर रहा है, कहीं वो किसी दिन सुरक्षाबलों की गोली का शिकार ना हो जाए।

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