फॉरेंसिक जांच में पुलवामा हमले को लेकर बड़ा खुलासा

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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ (CPFR) के काफिले पर हमले (Pulwama Attack) के मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। हमले में तीव्र क्षमता वाले मिलिटरी ग्रेड विस्फोटक आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था। यह विस्फोटक आतंकियों को पाकिस्तानी डिफेंस फोर्सेज से मिला था। फॉरेंसिक जांच में हुए इस खुलासे ने सबको चौंका दिया है।

जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने आरडीएक्‍स को भारत पहुंचाया था। इस हमले को अंजाम देने के लिए छह आतंकी भारत में घुसे थे और उन्‍होंने हमले की पूरी साजिश रची थी। हमले को अंजाम देने के लिए जिस गाड़ी का इस्‍तेमाल किया गया था उसका चेचिस नंबर भी मिटाने की कोशिश की गई थी।

जांच में पता चला है कि आतंकियों के पास अभी भी 20 किलो के करीब आरडीएक्‍स मौजूद है। जिसे वे कभी भी हमले में इस्‍तेमाल कर सकते हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इतना बड़ा विस्‍फोट करने के लिए आरडीएक्‍स को कई महीनों पहले ही भारत लाया गया था और हमले वाले दिन इसे 5 से 7 किलोमीटर की दूरी पर ही इसे तैयार किया गया था।

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सीनियर एक्सपर्ट्स ने दावा किया है कि इस हमले में करीब 50-70 किलोग्राम आरडीएक्‍स का इस्‍तेमाल किया गया था जिससे 100-300 किलोग्राम क्षमता वाली चीज को नष्‍ट किया जा सके।गौरतलब है कि 14 फरवरी को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर फिदायीन हमला हुआ था। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे और कई घायल हुए थे।

इस घटना के बाद सेना और सुरक्षाबलों ने अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। पाकिस्तानी संगठन की तरफ से हमले की जिम्मेदारी लेने के बाद भारत ने पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने की कोशिशें तेज कर दी हैं।

फरेंसिक एक्सपर्ट्स ने यह भी जानकारी दी है कि जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ने विस्फोटक रखने के लिए मारुति ईको वैन का उपयोग किया था। पुलवामा में आतंकी हमले के बाद जांच-टीम घटनास्थल पर पहुंची थी और साक्ष्‍य एकत्रित किये थे। जांच के बाद विशेषज्ञों ने मामले को लेकर अपनी रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आरडीएक्स बहुत स्थिर विस्फोटक है। इसका इस्‍तेमाल कार बम के तौर पर आसानी से किया जा सकता है।

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अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने हमले को लेकर एक खबर प्रकाशित की है जिसमें एक सूत्र के हवाले से बताया गया है कि फाइनल रिपोर्ट आने में कुछ वक्त लग सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक इसे तैयार करने के लिए पाकिस्‍तान से प्रशिक्षित आतंकी भारत आए थे। इतना ही नहीं हमले से कुछ वक्‍त पहले ही आतंकियों ने इसमें ट्रिगर, स्विच, डेटोनेटर और पावर फ्यूज लगाया गया था।

हमले को लेकर रिटायर्ड मेजर जनरल जीडी बक्‍शी ने दैनिक जागरण को बताया कि यदि फाइनल रिपोर्ट में इसमें आरडीएक्‍स के इस्‍तेमाल की पुष्टि हो जाती है तो पाकिस्‍तान का सच दुनिया के सामने उजागर हो जाएगा। आरडीएक्‍स हाईली मिलिट्री एक्‍सप्‍लोसिव होता है जो किसी भी सूरत से भारत में बाहर से नहीं आ सकता।

उनके मुताबिक इस हमले में पाकिस्‍तान ने बेहद शातिर तरीके से अमोनियम नाइट्रेट का इस्‍तेमाल किया है। अमोनियम नाइट्रेट वही यूरिया होता है जिसका इस्‍तेमाल खेतों में उपज को बेहतर करने में किया जाता है। लेकिन यही 200-300 किलो एक साथ इस्‍तेमाल किया जाए तो आरडीएक्‍स का काम करता है।

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ऐसे में यह किसी भी गाड़ी के परखच्‍चे उड़ा सकता है। नक्‍सली भी सुरक्षाबलों पर इसी तरीके का इस्‍तेमाल करते हैं। जनरल बक्‍शी का कहना है कि पाकिस्‍तान ने सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि अपनी काली करतूतों को ईरान में भी अंजाम दिया है। वहां पर भी इसी तरह से ईरान के 28 रिवोल्‍यूशनरी गार्ड की जान ली गई है।

जम्मू-कश्मीर में भी आईईडी विस्फोटों को अंजाम देने के लिए आतंकवादियों ने अपने तरीकों में बदलाव किया है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि विस्फोट को अंजाम देने के लिए आतंकवादी वाहनों के रिमोट अलार्म या चाबियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आशंका है कि हाल ही में पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमले में इसी तरीके को अपनाया गया है।

एक मीडिया रिपोर्ट में यहां तक कहा गया है कि 2018 के अंत में पाकिस्‍तान की सीमा से करीब 21 आतंकी भारत में दाखिल हुए थे। इनमें तीन आत्‍मघाती हमलावर भी शामिल थे। मसूद अजहर का भतीजा उमेर और कामरान इसका नेतृत्‍व कर रहे थे।

पुलवामा हमले के दौरान बारिश होने के कारण कई साक्ष्य मिट चुके हैं और अब फाइनल फॉरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, भारतीय सेना के पास उपलब्ध प्रति ग्राम आरडीएक्स निगरानी में रहता है, लेकिन पाकिस्तान की मिलिट्री आतंकी समूहों को किस तरह सह देती है, यह सभी जानते हैं।

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