हिंदुस्तान का ताना-बाना तोड़ सके ऐसा कोई हथियार नहीं, देश जितना ही बड़ा है हिंदुस्तानियों का दिल

pulwama attack citizen group came forward to help kashmiri

पुलवामा में CRPF जवानों के काफिले पर हुए आतंकी हमले (Pulwama Attack) के बाद देश के कई हिस्सों से कश्मीरी छात्रों एवं नागरिकों के साथ छिटपुट हिंसा की ख़बरें आईं। जिसके बाद केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों से वहां रह रहे जम्मू-कश्मीर के छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने को कहा है।

कश्मीरी लोगों की मदद के लिए सीआरपीएफ़ ने सीआरपीएफ़ मददगारनाम से ट्विटर हैंडल बनाया है। इस हैंडल से किए गए ट्वीट में कहा गया है कि कश्मीर से बाहर रह रहे कश्मीरी लोग ज़रूरत पड़ने पर 24 घंटे और हफ़्ते में सातों दिन उन्हें कॉल कर सकते हैं। सीआरपीएफ़ ने टोल फ़्री नंबर भी 14411 जारी किया है, जिस पर कश्मीरी नागरिक अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

एक तरफ शासन-प्रशासन अपना काम कर रही है तो दूसरी तरफ कश्मीरियों की मदद के लिए देश की एक बहुत बड़ी आबादी आगे आई है। लोगों ने अपने घरों के दरवाजे कश्मीरियों के लिए खोल दिए हैं। लोग उनके रहने और खाने पीने का इंतज़ाम भी कर रहे हैं। देश के कोने-कोने से लोगों ने सोशल मीडिया पर कई सारे हैशटैग चलाकर, अपने घर का पता बताकर उन्हें मदद करने की पेशकश की।

कश्मीरी छात्रों पर जहां-जहां से हमले की ख़बरें सामने आई, तुरंत ही सोशल मीडिया पर कई लोग उनके बचाव में आगे आए। लोगों ने बाक़ायदा अभियान चलाकर कहा कि जो भी कश्मीरी डरे हुए हैं वो उनके घर पर आकर रह सकते हैं। लखनऊ के कई लोगों ने सोशल मीडिया पर कश्मीरियों को परेशान न करने की अपील करने के साथ उन्हें कोई दिक्कत होने पर अपने घर में हिफाजत देने की बात भी की है। लोगों ने कश्मीरियों को अपने घरों में शरण दिया है।

ऐसे ही चंडीगढ़ में भी लोगों ने कश्मीरी छात्रों को अपने मकानों में शरण दिया है। बहुत से छात्रों को चंडीगढ़ और देहरादून के गुरुद्वारा प्रबंध समिति ने गुरुद्वारों में भी शरण दी है। इन छात्रों के लिए तमाम सुविधाओं का इंतज़ाम गुरुद्वारा कमेटी कर रही है। देहरादून के स्थानीय नागरिक भी इस घड़ी में कश्मीरी छात्रों की मदद करने आगे आए एवं अपने घरों में छात्रों को ठहरने की जगह मुहैया कराई।

दिल्ली में भी कई लोगों ने अपने घरों के दरवाज़े कश्मीरियों के लिए खोल दिए हैं। स्थानीय नागरिकों से लेकर बाहर से आकर रह रहे लोगों ने भी कश्मीरियों की मदद करने में तत्परता दिखाई। यही तो इस मुल्क की खूबसूरती है, यही तो यहां की परंपरा और संस्कृति रही है। लोग अपने दुखों को भूल कर हमेशा दूसरों के दुख-दर्द में शामिल हो जाते हैं।

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