उगाही के पैसों को म्यूचुअल फंड में खपाते हैं नक्सली

naxal, latehar, jharkhand, mutual funds, investment

झारखंड में अपने दहशत के बल पर करोड़ों रुपये की उगाही करने वाले नक्सली अब म्यूचुअल फंड में निवेश कर अपना भविष्य संवारने की कोशिश में लगे हुए हैं। जमीन और फ्लैट में निवेश करने वाले माओवादी नेताओं ने अब म्यूचुअल फंड में भी निवेश करना शुरू कर दिया है। एनआईए डीआईजी केबी वंदना ने इस संबंध में अपनी एक जांच रिपोर्ट झारखंड पुलिस मुख्यालय और आयकर विभाग को भेजा है। जिसमें यह जिक्र है कि कई बड़े माओवादी नेताओं ने म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश करना शुरू कर दिया है।

नोटबंदी के बाद पुराने नोट बरामदगी के एक मामले की जांच के दौरान यह खुलासा हुआ। झारखंड में 25 लाख के इनामी रहे माओवादी नेता बड़ा विकास ने 26 लाख 50 हजार और 15 लाख के इनामी नक्सली छोटू खेरवार ने 1.80 लाख का निवेश म्यूचुअल फंड में किया है। जो माओवादी म्यूचुअल फंड में निवेश करने का विरोध करते थे, अब खुद वही म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट कर रहे हैं। इतना ही नहीं उनके रिश्तेदारों ने भी इन कंपनियों में निवेश किया है।

दरअसल, 21 दिसंबर 2016 को लातेहार, बालूमाथ पुलिस ने एक बैंक मैनेजर चंदन कुमार को तीन लाख रुपये के पुराने नोट के साथ गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद यह बात सामने आई थी कि चंदन कुमार ने नक्सल कमांडर छोटू खेरवार की पत्नी ललिता के खाते में 15 लाख रुपये जमा कराए। बालूमाथ पुलिस ने चंदन कुमार, छोटू खेरवार, खेरवार के करीबी संतोष उरांव, उसकी पत्नी ललिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया था। जिसके बाद इस मामले में एनआईए ने 19 जनवरी 2018 को केस दर्ज कर इसकी जांच शुरू की थी।

माना जा रहा है कि राज्य के लगभग एक दर्जन बड़े माओवादिओं ने म्यूचुअल फंड में निवेश किया है। सुधाकरण, मिथिलेश, अजय महतो, टीपीसी सुप्रीमो बृजेश गंजू, कोहराम, सुभान मियां, पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप समेत दो दर्जन से अधिक नक्सलियों के रियल स्टेट, जमीन और कंपनियों में निवेश का खुलासा तो पहले ही हो चुका है। झारखंड में एनआईए की टीम ने कोल परियोजनाओं से टीपीसी नक्सलियों के लेवी के पैसे से टेरर फंडिंग का खुलासा भी किया है।

एनआईए ने अपने जांच में यह पाया है कि माओवादियों ने दो कंपनियों के म्यूचल फंड में निवेश किया है। इन कंपनियों के दफ्तर रांची, कोलकाता और इलाहाबाद में हैं। एनआईए की रिपोर्ट में यह भी जिक्र है कि माओवादी बड़ा विकास ने इन कंपनियों में सबसे अधिक पैसों का निवेश किया है। बड़ा विकास ने साल 2016 में उसने सरेंडर कर दिया था। सरेंडर करने के बाद से ही वह जेल में है। एनआईए ने निवेश किए गए कंपनियों के निदेशकों की गतिविधियों को भी संदिग्ध बताया है। एनआईए ने राज्य पुलिस को इन म्यूच्यूअल फंड कंपनियों पर कार्रवाई के लिए भी पत्र लिखा है।

इन बातों से एक बात तो स्पष्ट है कि नक्सलियों को अपना भविष्य सुरक्षित नजर नहीं आ रहा। उन्हें अच्छी तरह समझ आ गया है कि उनके दिन जल्द ही लदने वाले हैं। यही वजह है कि वे आर्थिक निवेश कर अपने आने वाले कल को सुरक्षित करने की कोशिश में लगे हैं।

इसे भी पढ़े: जबरन शादी से बचने के लिए नक्सली संगठनों में शामिल हो रही लड़कियां

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here