नक्सलियों को पूर्वोत्तर-सीमा से हो रही असलहों की सप्लाई

naxal weapon supply

नक्सलियों को काफी पहले से ही पूर्वोत्तर से सटे पड़ोसी देशों से हथियारों की सप्लाई हो रही है। नक्सलियों के पास से पहले भी चीन से भेजे गए ग्रेनेड, बंदूकें और कारतूस बरामद हो चुके हैं। इन्हें चीन से म्यांमार के रास्ते मणिपुर में सप्लाई किया जाता है। जहां से उग्रवादी संगठनों द्वारा बंगाल के रास्ते रायपुर पहुंचाया जाता है। इससे पहले रायपुर में कारतूस, गोला बारूद और विस्फोटकों की सप्लाई का भी पर्दाफाश हो चुका है।

पुलिस इस मामले में बड़े शहरी नेटवर्क का खुलासा कर चुकी है। नक्सली ऑर्गेनाइजेशन ऑपरेट करने वालों ने हथियारों को जंगल तक पहुंचाने के लिए पूरा सिस्टम खड़ा किया है। इसके लिए वे लोकल लोगों की मदद लेते हैं। उन्हें भेजकर हथियार मंगवाया जाता है क्योंकि वे जंगल के रास्तों से अच्छी तरह वाकिफ होते हैं। ऐसे में वे आसानी से घने जंगलों में दाखिल हो सकते हैं जहां फोर्स की मौजूदगी का कोई खतरा नहीं रहता।

दरअसल, रांची, लातेहार और बोकारो में नागालैंड से आधुनिक हथियारों की तस्करी हो रही है। एके-47, एके-56, कारबाइन जैसे हथियार झारखंड के पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट आफ इंडिया (पीएलएफआइ), तृतीय प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) जैसे उग्रवादी संगठनों के पास पहुंचाए जा रहे हैं। इन हथियारों को नागालैंड के फर्जी आर्म्स लाइसेंस के जरिए बिहार और झारखंड तक लाया जा रहा है। हथियारों का लिंक म्‍यांमार से जुड़ा है, ये हथियार म्यांमार सेना के हैं।

यह बात पूर्णिया में दालकोला चेकपोस्ट के पास जांच के दौरान सफारी से बरामद एके-47 के अलावा काफी मात्रा में गोलियों के कंसाइनमेंट की डिलिवरी के पकड़े जाने से सोमने आई है। यह डिलिवरी आरा के रहने वाले तस्करों मुकेश सिंह व संतोष सिंह के पास होनी थी। पुलिस की रिकॉर्ड में हथियार की तस्करी को लेकर इन दोनों का पुराना रिकॉर्ड है। बिहार और झारखंड पुलिस इसका पता लगा रही है कि म्यांमार सेना के हथियार यहां तक कैसे पहुंच रहे हैं।

इन हथियारों की तस्करी का मामला तब खुला जब बिहार की पूर्णिया पुलिस ने गैंग के मास्टरमाइंड मुकेश सिंह को रांची के अरगोड़ा से गिरफ्तार किया। वह झारखंड के नक्सलियों व उग्रवादियों को हथियारों के साथ बुलेटप्रूफ जैकेट भी सप्लाई कर रहा था। उसके के दो साथी भी पकड़े गए हैं। उग्रवादियों को दो लाख रुपये में बुलेटप्रूफ जैकेट और 8.50 लाख रुपये में एके-47 सप्लाई हो रही है। वहीं 1.20 लाख रुपये में ये लोग नागालैंड के फर्जी आर्म्स लाइसेंस भी बनवाते थे।

गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पता चला है कि इस तस्करी के तार मणिपुर और नगालैंड से भी जुड़े हैं। इसमें उग्रवादी संगठन एनएससीएन-आईएम (नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम-इजाक मोयेका) का हाथ होने की बात सामने आ रही है। उल्फा भी शक के दायरे में है। दरअसल एनएससीएन-आईएम के दो संस्थापकों में से एक इजाक की मौत हो चुकी है, जबकि दूसरा मोटेना उखरुल (मणिपुर) का रहने वाला है। गिरफ्तार तीन आरोपियों में दो वीआर कहोरनगम व क्लियरसन काबो भी उखरुल के ही रहने वाले हैं। जांच चल रही है कि कहीं अपराधियों के अलावा नक्सलियों को भी इन हथियारों की सप्लाई तो नहीं होती है।

म्यांमार आर्मी के हथियारों की खेप पहले भी बिहार पहुंची है। पिछले साल भी एक कंसाइनमेंट की डिलिवरी पटना में हुई थी। एडीजी (मुख्यालय) कुंदन कृष्णन के मुताबिक उस वक्त भी 4 एके-47 राइफल के अलावा 5 हजार गोलियों की बड़ी खेप को तस्कर मुकेश सिंह ने ही रिसीव किया था।

जानकारी के मुताबिक, बरामद हुए म्यांमार आर्मी के एके-47 राइफल के साथ अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर (यूबीजीएल) व गोलियां काफी खतरनाक हैं। मोडिफाई किए गए एके-47 में यूबीजीएल को सेट कर ग्रेनेड फायर किया जाता है। एंटी नक्सल ऑपरेशन में लगी सीआरपीएफ व अन्य एजेंसियां यूबीजीएल वाले एके-47 का ही इस्तेमाल करती हैं। बरामद गोलियों में 9.96 एमएम व अन्य बोर की हैं। इनमें 9.96 एमएम की गोलियों का इस्तेमाल इनसास जैसे राइफलों में किया जाता है। संभवत: सुरक्षा बलों से मुकाबला करने के लिए नक्सली यूबीजीएल वाले हथियार मंगवा रहे हों। भारत-म्यांमार बॉर्डर के जरिए संगठित तरीके से आधुनिक हथियारों की तस्करी हो रही है।

नक्सलियों के इस तरह के घातक कदम को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने असम राइफल्स को कुछ खास अधिकार दिए हैं। असम राइफल्स काफी संवेदनशील भारत-म्यांनमार सीमा तैनात रहती है। पर इसके अनुसार असम राइफल्स बिना वारंट के किसी को भी गिरफ्तार कर सकता है। राइफल्‍स को मिले इस अधिकार से नक्‍सलियों पर लगाम लगाने में काफी मदद मिलेगी। इसके तहत पूर्वोत्तर राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नगालैंड और मिजोरम में असम राइफल्‍स बिना वारंट के किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है और कहीं भी तलाशी ले सकती है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस पर नोटिस भी जारी कर दिया है। सीआरपीसी की धारा-41 के तहत कोई भी पुलिस अधिकारी बिना मजिस्ट्रेट के आदेश और बिना वारंट के किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है, धारा-47 के अंतर्गत व्यक्ति जिस स्थान पर जाता है वहां की तलाशी ली जा सकती है और धारा-48 के अनुसार, पुलिस अधिकारी वांछित व्यक्ति का किसी भी स्थान तक पीछा कर सकते हैं।

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