आखिर कौन है अपने ही देश का दुश्मन?

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नक्सलवाद जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा है, उसे न सिर्फ़ देश के कुछ संगठनों का शह हासिल है बल्कि सरहद पार मुल्क के दुश्मन भी अपनी नापाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए नक्सलवाद मूवमेंट को समय समय पर खाद-पानी देते रहते हैं। अभी हाल में बिहार के रजौली में हुए मुठभेड़ में नक्सलियों ने पाकिस्तान में निर्मित एके-47 की गोलियों का इस्तेमाल किया था। इस बात को सुरक्षा एजेंसियों ने बेहद गम्भीरता से लिया है। नक्सलियों का पाकिस्तान कनेक्शन कोई नई बात नहीं है। नक्सली संगठनों को पाकिस्तान और चीन जैसे देश शुरुआत से ही गोले-बारूद और हथियार सप्लाई करते रहे हैं।

सबसे पहले 2005 में नक्सलियों ने पाकिस्तान में बनी गोलियों का इस्तेमाल छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में एक थाने पर हमले के दौरान किया था। पुलिस की फारेंसिक जांच में ये भी पता चला था कि नक्सलियों ने पाकिस्तान के जिस फैक्ट्री में बनी गोलियों का इस्तेमाल किया था, उसी गोली का इस्तेमाल संसद पर हमले के दौरान किया गया था। खुफिया विभाग की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार छत्तीसगढ़ में नक्सलियों की बैठक में लश्करे तैयबा के दो आतंकियों के शामिल होने की बात भी सामने आई थी। जिससे पता चलता है कि पाकिस्तान किस तरह से नक्सल-मूवमेंट को हवा दे रहा है।

खैर, प्रशासन इस ताजा मामले को बेहद गम्भीरता से ले रहा है। साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि नक्सलियों के पास पाकिस्तान में निर्मित गोलियां कैसे पहुंच रही हैं। प्रशासन ने इन गोलियों को फोरेन्सिक जांच के लिए भेज दिया है जिससे ये पता चल सके कि ये गोलियां पाकिस्तान के किस फ़ैक्टरी में बनी हैं।

कुछ समय पहले तक पूर्वोतर राज्यों के ज़रिए दुश्मन हथियार बारूद सप्लाई करते रहे हैं। पर सुरक्षा बलों की चौकसी एवं खुफिया मजबूती के कारण इसपर काफ़ी हद तक लगाम लगा है। प्रशासन इस वक़्त ये पता लगाने की कोशिश में है कि किस रास्ते से दुश्मन गोला-बारूद भेज रहा है और देश के कौन-कौन से संगठन इस खेल में शामिल हैं।

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